राज्य की दलील-समाज के बड़े वर्ग में समलैंगिक विवाह की स्वीकार्यता नहीं
राज्य की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि समलैंगिक संबंधों को समाज के एक बड़े पारंपरिक वर्ग में स्वीकार्यता नहीं मिली है। इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने का प्रश्न अलग है। विवाह का वैधानिक दर्जा न होने से दो बालिग व्यक्तियों के सहमति से साथ रहने और उनकी सुरक्षा के अधिकार प्रभावित नहीं होते।
पुलिस को सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश
कोर्ट ने कहा कि दोनों युवतियों को शांतिपूर्वक साथ रहने की स्वतंत्रता है और परिवार या अन्य व्यक्ति उनके संबंध में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। किसी तरह की बाधा उत्पन्न होने पर वे आदेश की प्रमाणित प्रति के साथ संबंधित पुलिस आयुक्त, एसएसपी या एसपी से संपर्क कर सकती हैं। पुलिस को उनकी बालिग होने की पुष्टि के बाद आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।