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Prayagraj : कुष्ठ रोग निवारण दिवस - कुष्ठ रोग के लक्षण मिलें तो परिवार के लोगों की भी कराएं जांच, छिपाएं नहीं

Fri, 30 Jan 2026 02:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कुष्ठ रोग के लेकर आज भी लोगों में जागरूकता का अभाव है। अभी भी लोग कुष्ठ रोग के उपचार को लेकर झोला छाप डॉक्टरों का सहारा लेते हैं। जिसके परिणामस्वरूप सही उपचार मिलने में देरी होती है।
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कुष्ठ रोग। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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कुष्ठ रोग के लेकर आज भी लोगों में जागरूकता का अभाव है। अभी भी लोग कुष्ठ रोग के उपचार को लेकर झोला छाप डॉक्टरों का सहारा लेते हैं। जिसके परिणामस्वरूप सही उपचार मिलने में देरी होती है। इस कारण मरीजों का कुष्ठ रोग गंभीर अवस्था में पहुंच जाता है। इसके अलावा उनके परिवार व मरीज के संपर्क में आने वाले अन्य लोग भी संक्रमण का शिकार हो जाते हैं।

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जिला कुष्ठ रोग विभाग के अनुसार जनपद में कुल 158 रोगी हैं। इसके अलावा स्वरूप रानी नेहरु चिकित्सालय में 10 से 12 और दी लेप्रोसी मिशन में हर महीने 140 से अधिक गंभीर कुष्ठ रोगियों का उपचार किया जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि अगर मरीज तीन महीने से पहले अपना उपचार शुरू करें और अपने साथ परिवार व संपर्क में आने वाले अन्य लोगों की तत्काल जांच कराएं तो इस रोग को फैलने से रोका जा सकता है। क्योंकि समय पर उपचार शुरू होने से मात्र एक साल के भीतर कुष्ठ रोग से राहत मिलने लगती है।

बेटे ने छुपाया, मां भी हुई कुष्ठ रोग का शिकार
संत रविदास नगर निवासी 14 वर्षीय एक बच्चे के शरीर के हाथ में जलने जैसा घाव था। इस दौरान बच्चे के दादा ने उसका उपचार लेप्रोसी मिशन से शुरू कर दिया। लेकिन इस दौरान आपसी कलह के चलते ससुराल से अलग रह रही मां को बच्चे के कुष्ठ रोगी होने का पता नहीं चल सका। जिसके चलते बच्चे से संपर्क में आने की वजह से मां भी संक्रमित हो गई। वहीं, बच्चे का उपचार चलते तीन साल हो गया है। जबकि मां में तीन महीने पहले कुष्ठ रोग की पुष्टि हुई है।

झोला छाप से चला इलाज, अब हैं भर्ती
मध्य प्रदेश के नागोर सतना निवासी 65 वर्षीय वृद्ध के हाथ में जलने जैसा घाव था। वह करीब एक साल तक गांव के झोला छाप डॉक्टर से उपचार कराता रहा। वहीं, 31 दिसंबर को परेशानी बढ़ने के बाद वह उपचार कराने लेप्रोसी अस्पताल पहुंचा। जहां ब्लड और स्किन स्मीयर टेस्ट में कुष्ठ रोग की पुष्टि हुई। वहीं, जांच करने पर पता चला कि मरीज की 60 वर्षीय पत्नी भी छह महीने से कुष्ठ रोगी हो गई है। फिलहाल अब दोनों का उपचार चल रहा है।

क्या है कुष्ठ रोग
कुष्ठ रोग जिसे हैनसेन रोग भी कहा जाता है, माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक बैक्टीरिया से होने वाला एक दीर्घकालिक, संक्रामक रोग है। यह मुख्य रूप से त्वचा, परिधीय तंत्रिकाओं, ऊपरी श्वसन नली और आंखों को प्रभावित करता है। यह रोग स्पर्श से नहीं फैलता, लेकिन इलाज न होने पर स्थायी विकलांगता, नसों को नुकसान और त्वचा पर सुन्न धब्बों का कारण बन सकता है। समय पर मल्टी-ड्रग थेरेपी (एमडीटी) की तरफ से इसका पूर्ण इलाज संभव है। 
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क्या है लक्षण
कुष्ठ रोग के प्रमुख लक्षणों में त्वचा पर रंगहीन या हल्के रंग के सुन्न धब्बे, नसों में मोटाई और संवेदनहीनता, हाथों-पैरों में कमजोरी और चेहरे पर गांठें शामिल हैं।

अभी भी लोग कुष्ठ रोग छिपाने में लगे रहते हैं, जिसकी वजह से उनके संपर्क में आने की वजह से परिवार व अन्य लोग भी संक्रमित हो जाते हैं। कुष्ठ रोग के लक्षण मिलने पर परिवार व अन्य संपर्क में आने वालों की भी जांच कराएं, तभी इस रोग को फैलने से रोका जा सकता है। - डॉ. संदीप कुमार, सुपरिटेंडेंट, लेप्रोसी मिशन।

कुष्ठ रोग के लक्षण होने पर अधिकांश लोग झोला छाप डॉक्टरों के चक्कर में पड़कर उपचार का सही समय गंवा देते हैं। जिसके बाद उनका उपचार जटिल हो जाता है। हालांकि, कई मरीजों को ठीक कर लिया जाता है। लेकिन कई मरीजों की परेशानी पूर्णत: सारी जिंदगी नहीं जाती है। - डॉ. अमित शेखर, विभागाध्यक्ष, त्वचा रोग विभाग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज
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