पूरे प्रदेश में प्रमाण पत्र सबसे अधिक 19320 आवेदप प्रतापगढ़ में फंसे, प्रयागराज तीसरे स्थान पर
प्रयागराज। लेखपालों की हड़ताल की वजह से सबसे अधिक प्रयागराज मंडल के लोगों के आवेदन अटके हैं। अकेले प्रतापगढ़ में 19320 लोगों के निवास, आय और जाति प्रमाणपत्र के आवेदन लंबित हैं और प्रदेश में पहला स्थान है। वहीं, प्रयागराज जिले में 17492 आवेदनों को लेखपालों के सत्यापन का इंतजार है और यह तीसरे स्थान पर है।
आठ सूत्रीय मांग को लेकर लेखपाल 10 दिसंबर से हड़ताल पर है। इसकी वजह से जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र जारी करने का काम पूरी तरह से ठप हो गया है। लोगों की परेशानी को इससे ही समझा जा सकता है कि 26 दिसंबर तक के प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पूरे प्रदेश में प्रमाण पत्र के छह लाख 40 हजार 600 आवेदन लटके हैं। दूसरे स्थान पर जौनपुर है और वहां 18838 आवेदन लंबित हैं। इनके अलावा गाजीपुर है जहां 15 हजार से अधिक आवेदकों को हड़ताल खत्म होने का इंतजार है। गाजीपुर में 15903 आवेदन लंबित हैं। वहीं प्रयागराज मंडल के फतेहपुर जिले में 1140 तथा कौशाम्बी में 8147 आवेदन लंबित हैं।
आईजीआरएस के हजारों मामले भी डिफाल्टर
0 लेखपालों की हड़ताल की वजह से आईजीआरएस के हजारों मामले भी डिफाल्टर हो गए हैं। मुख्यमंत्री तथा अन्य स्थानों पर हुई शिकायतों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह से अकेले प्रयागराज में 1500 से अधिक शिकायतें डिफाल्टर की श्रेणी में शामिल हो गई हैं। इसके अलावा राजस्व, पैमाइस आदि काम भी प्रभावित हो गए हैं।
कुछ मांगें पूरी होने पर भी हड़ताल खत्म करने को तैयार लेखपाल
-अफसरों का एक-दो दिनों में सकारात्मक परिणाम का दावा लेकिन लेखपाल अडिग
प्रयागराज। आठ सूत्रीय मांग को लेकर लेखपाल शुक्रवार को भी हड़ताल पर रहे। आंदोलन के समर्थन में उन्होंने कलक्ट्रेट परिसर में धरना दिया और उसमें बड़ी संख्या में लेखपाल जुटे। इसके विपरीत प्रशासन का दावा है कि एक-दो दिनों में सकारात्मक परिणाम आएंगे।
लेखपाल अब चार से पांच मांग पूरी होने पर भी हड़ताल खत्म करने के लिए तैयार हैं लेकिन इसके लिए जिला स्तर पर दबाव बनाए जाने के बजाय संघ के प्रदेश पदाधिकारियों से वार्ता की की बात कही। धरना के दौरान आयोजित सभा में लेखपालों का कहना था कि उनकी कई मांगें हैं जिसमें शासन को बहुत कुछ नहीं करना है। ऐसी मांगें भी मान ली जाएं तो वे हड़ताल खत्म करने पर विचार कर सकते हैं लेकिन सरकार वार्ता के बजाय आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रही है। इससे वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। संघ के जिलाध्यक्ष राजकुमार सागर का कहना था कि संघर्ष समिति का गठन हो गया है। इसलिए जिला इकाई अब निर्णय नहीं ले सकती। किसी तरह की वार्ता प्रदेश कार्यकारिण्ी से करनी होगी। हड़ताल और सभा में राकेश चंद्र यादव, विवेकानंद त्रिपाठी, अवनीश पांडेय, विकास सिंह, अनूप कुमार, गंगादीन आदि शामिल रहे। वहीं सीआरओ भानु प्रताप का कहना है कि लेखपालों से वार्ता की जा रही है। एक-दो दिनों में इसका नतीजा दिखेगा।