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बौद्धिकता में प्रसाद समकालीनों में अग्रणी

Sat, 26 Sep 2015 01:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। छायावाद के प्रतिनिधि रचनाकार जयशंकर प्रसाद के सांस्कृतिक व्यक्तित्व पर सीएमपी डिग्री कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में उन्हें समकालीन रचनाकारों में विलक्षण परंपरा का व्यक्तित्व बताया गया। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अभिराज प्रो. राजेंद्र मिश्र ने कहा कि प्रसाद की काव्य, नाटक, कहानी, उपन्यास, निबंध एवं आलोचना के क्षेत्र में सशक्त उपस्थिति है। उन्होंने प्रसाद के रचना संसार पर अपनी बात रखी। उद्घाटन सत्र के विशिष्ट अतिथि डीन सीडीसी प्रो. असीम मुखर्जी ने निराला और प्रेमचन्द के समान ही प्रसाद को प्रोग्रेसिव रचनाकार बताया।
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कार्यक्रम के दौरान विषय प्रवर्तन सीएमपी डिग्री कॉलेज में हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनुपम आनंद ने किया। उन्होंने प्रसाद की रचनाओं को नवजागरण की सशक्त अभिव्यक्ति बताया। अध्यक्षता केपी ट्रस्ट के अध्यक्ष चौधरी राघवेन्द्र नाथ सिंह ने की। संचालन डॉ. आभा त्रिपाठी एवं धन्यवाद डॉ. सरोज सिंह ने किया। कार्यक्रम प्राचार्य डॉ. आनंद कुमार श्रीवास्तव के निर्देशन में हुआ।

गोष्ठी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं सीएमपी डिग्री कॉलेज के सम्मिलित प्रयास से आयोजित की गई। संगोष्ठी के प्रथम सत्र के वक्ता प्रो. लाल बहादुर वर्मा ने प्रसाद को बौद्धिकता में अपने समकालीनों में सबसे अग्रणी बताया। तीसरे सत्र में मुख्य वक्ता रूहेलखंड विवि के पूर्व कुलपति प्रो. ओम प्रकाश ने उन्हें राष्ट्रीय पुर्नजागरण का प्रणेता बताया। संगोष्ठी में दूसरे दिन प्रसाद के कलात्मक, प्रगीत तत्व एवं सौंदर्यानुभूति पर चर्चा होगी।
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