उनके हाथ में कैंची थी और सर्जिकल ब्लेड भी था। इन्हीं सर्जिकल सामानों से हमला होने का आरोप है। किसी की कलाई में चोट लगी, किसी के गर्दन के पास चोट लगी। वीडियो बनाने की कोशिश हुई तो डॉक्टरों ने फोन छीन लिया। फोन करके बुलाने पर अधिवक्ता के साथियों में जो भी आया उन सभी से ट्रॉमा सेंटर में जमकर मारपीट और गाली गलौज का आरोप है।
लखनऊ कर दिया गया था रेफर
एसआरएन में बवाल के कारण उपचार के लिए जागृति को शहर के एक निजी ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था। हालत नाजुक होने पर उन्हें पीजीआई लखनऊ के लिए रेफर कर दिया गया। 18 दिनों तक चले उपचार के बाद महिला अधिवक्ता की सांसें सोमवार को सुबह छह बजे थम गईं। यह खबर मिलते ही अधिवक्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई।