हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के 24 नवंबर को होने वाले चुनाव में इस बार मतदाताओं की संख्या को लेकर वकीलों और प्रत्याशियों में खलबली है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि 31 अगस्त तक सदस्यता शुल्क जमा कर चुके सदस्यों का नाम ही मतदाता सूची में शामिल किया जाए। इस आदेश के बाद प्रत्याशियों और आम वकीलों को आशंका है कि मतदाता सूची में कुछ हजार ही वकीलों का नाम शामिल हो पाएगा। पूर्व संयुक्त सचिव जेबी सिंह ने एल्डर कमेटी के अलावा बार अध्यक्ष और सचिव को पत्र भेज कर आम सभा बुलाने और सदस्यता शुल्क जमा करने की तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया है।
जेबी सिंह का कहना है कि परंपरागत अधिकार के तहत सदस्यों के लिए चुनाव के समय शुल्क जमा करने का अवसर दिया जाता रहा है। अधिवक्ता फोरम ने बैठक कर न्यायालय द्वारा चुनाव हेतु गठित अंतरिम समिति से मांग की है कि परंपरा के अनुसार बार चुनाव की घोषणा होने के बाद सदस्यता शुल्क जमा करने की अनुमति दी जाती रही है। फोरम के संयोजक राजेश खरे का कहना है कि जिन 10850 वकीलों ने ‘वन बार वन वोट’ का विकल्प भरा है, उनको सदस्यता शुल्क जमा करने की अनुमति दी जाए। बैठक की अध्यक्षता राजेंद्र प्रसाद तिवारी ने की।
दूसरी ओर बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव प्रेस आशीष कुमार मिश्र ने विज्ञाप्ति जारी कर कहा है कि मुख्य चुनाव अधिकारी वीएम जैदी के इस्तीफे की बात का भ्रामक रूप से प्रचार किया गया, क्योंकि जैदी ने मुख्य चुनाव अधिकारी का पद ग्रहण ही नहीं किया था। फिर उनके इस्तीफे का प्रश्न कहां से उठता है। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची के लिए दिए गए घोषणा पत्रों की छंटाई का काम सघनता से चल रहा है, इसलिए अभी यह कह पाना मुमकिन नहीं है कि कुल कितने सदस्य मतदाता सूची में शामिल हो पाएंगे।