शिक्षा सेवा अधिकरण बिल वापसी के लिए आज इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। आंदोलन में शिक्षक, छात्र और व्यापारी संगठन भी वकीलों के साथ हैं। रविवार को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में पत्रकारों से वार्ता के दौरान बार के पदाधिकारियों ने कहा कि बिल वापसी तक न तो उनका आंदोलन रुकेगा और न ही कोई समझौता होगा। हालांकि न्यायिक कार्य से विरत रहने का प्रस्ताव अनिश्वितकालीन नहीं है और भविष्य की परिस्थितियों को देखते हुए इस निर्णय लिया जाएगा।
अमरेंद्र नाथ सिंह का कहना है कि मौजूदा समय में हाईकोर्ट के कुल मुकदमों का लगभग पच्चीस फीसदी काम शिक्षा और इससे जुड़े मामलों का है। दो लाख मुकदमे इलाहाबाद हाईकोर्ट में और 75 हजार मुकदमे लखनऊ पीठ में हैं। इनकी सुनवाई के लिए इलाहाबाद में दस और लखनऊ में पांच पीठें नामित हैं। यह सभी मुकदमे अब अधिकरण में स्थानांतरित होंगे और उनकी सुनवाई के लिए नौ रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट होंगे, जिनको न तो न्यायिक कार्य का अनुुुभव है और न ही जानकारी। स्पष्ट है कि सरकार शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों के लिए न्याय के दरवाजे बंद करना चाहती है।
स्पष्ट नहीं है प्रारूप
अध्यक्ष का कहना है कि मौजूदा बिल में अधिकरण का प्रारूप स्पष्ट नहीं है। इसके निर्णयों के खिलाफ अपील कहां होगी, इसका जिक्र नहीं है। वादकारी को अपना पक्ष रखने के लिए वकीलों के अलावा भी अन्य लोगों की मदद लेने की छूट दी गई है, जो उचित नहीं है।