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लाक डाउन तक न्यायिक कार्य करने के पक्ष में नहीं हैं वकील

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शुक्रवार को जिला न्यायालय में जमानत प्रार्थना पत्रों की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता और वादकारियों की भारी भीड़ को देखते हुए जिला अधिवक्ता संघ के मंत्री राकेश कुमार दुबे और एल्डर कमेटी के सदस्य उमाशंकर तिवारी ने चिंता जताई है। साथ ही उन्होंने जिला जज और हाई कोर्ट से तत्काल न्यायिक कार्य स्थगित करने की मांग की है। अधिवक्ता गणों का कहना है कि अव्यवस्था के कारण सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हुआ है। संघ के मंत्री का कहना है कि बचाव पक्ष और अभियोजन के अधिवक्ता को पक्ष रखने के लिए एकमात्र वीडियो कांफ्रेंसिंग रूम बनाया गया है, जिससे सुनवाई में असुविधा हो रही है और अधिवक्ताओं की भारी भीड़ एकत्र हो जा रही है। इससे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण कोरोना संक्रमण का खतरा है। एक ही स्थान पर भीड़ हो जाने से अधिवक्ता दिशा निर्देशों का पालन नहीं कर पा रहे हैं।
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एल्डर कमेटी के सदस्य उमाशंकर तिवारी का कहना है कि जब तक लॉक डाउन है, तब तक के लिए न्यायिक कार्य स्थगित कर दिया जाए और यदि इसे जारी रखा जाना है तो सोशल डिस्टेंसिंग के अनुसार न्याय कार्य किए जाने की व्यवस्था की जाए। संघ के मंत्री ने नए जमानत प्रार्थना पत्रों के प्रस्तुत करने के लिए जिला न्यायालय द्वारा ईमेल की व्यवस्था को ठीक नहीं माना है। उनका कहना है कि इससे आम अधिवक्ताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा उन्होंने न्यायालय परिसर में सफाई और पेयजल की व्यवस्था तत्काल किए जाने की मांग की है। मंत्री का कहना है कि वह न्यायिक कार्य में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं, किंतु उसके अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे सोशल डिस्टनसिंग का पालन हो और अधिवक्ताओं पर संक्रमण का खतरा ना हो। सिविल मामलों की भी सुनवाई की मांग जिला न्यायालय के अधिवक्ताओं ने सिविल मुकदमों की सुनवाई की मांग की है। उनका कहना है कि निषेधाज्ञा के मामले की सुनवाई हो। जिला न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता यतींद्र मिश्र ने जिला जज से मांग की है कि सिविल के मुकदमों में निषेधाज्ञा एप्लीकेशन पर भी स्पेशल कोर्ट सुनवाई करें।
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