इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के कविनगर थाने में श्मशान की भूमि के विवाद में दर्ज आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही रद्द कर दी। कहा कि प्रथम दृष्टया कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे मुकदमा चलाया जा सके। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने की।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के कविनगर थाने में श्मशान की भूमि के विवाद में दर्ज आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही रद्द कर दी। कहा कि प्रथम दृष्टया कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे मुकदमा चलाया जा सके। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने की।
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याची आशु गर्ग और पांच अन्य पर 2022 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप था कि विवादित भूमि पर एक महिला का अंतिम संस्कार किया गया। इससे आसपास संक्रमण फैलने की आशंका उत्पन्न हुई थी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले का संज्ञान लिया और समन जारी कर दिया। याचियों ने मुकदमे की पूरी कार्यवाही को चुनौती देते हुए याचिका दायर की।
अधिवक्ता ने दलील दी कि याचियों को दुर्भावना के तहत झूठा फंसाया गया है। याची नवनिर्माण सामाजिक विकास समिति के सदस्य हैं। समिति ने कब्रिस्तान को भूमाफिया के अतिक्रमण से बचाने के लिए प्रशासन को आवेदन दिया था। इससे उन्हें झूठा फंसाया गया है। अभियोजन मृतका विमला देवी से याचियों का कोई संबंध स्थापित नहीं कर सका।