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कानून मंत्री से मुलाकात के बाद होगा समाधान

Tue, 16 Dec 2014 01:36 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला इलाहाबाद
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इलाहाबाद। हाईकोर्ट की खंडपीठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बनाने संबंधी बयान से केंद्रीय कानून मंत्री के इंकार पर वकीलों को एतबार नहीं है। इसे लेकर सोमवार को आम सभा की बैठक काफी हंगामेदार रही। वकीलों की राय थी कि कानून मंत्री से मुलाकात के बाद इस मुद्दे पर कोई निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। लिहाजा तय किया गया कि बार का प्रतिनिधि मंडल कानून मंत्री से मिलने दिल्ली जाएगा। आम सभा ने प्रस्ताव पारित कर मंगलवार को भी न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है। आगे की रणनीति के लिए कल (16 दिसंबर) की आम सभा में निर्णय होगा।
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रविवार को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा जारी बयान में कहा गया कि केंद्रीय कानून मंत्री की ओर से स्पष्टीकरण आया है कि उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खंडपीठ बनाने के लिए कोई बयान नहीं दिया है।

प्रदेश सरकार की ओर से भी ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। सोमवार को आम सभा में यह जानकारी रखी गई, मगर सदस्य इससे सहमत नहीं हुए। बार-बार पश्चिमी यूपी में बेंच बनाने के नाम पर की जा रही राजनीति से वकीलों में काफी आक्रोश था। वह कानून मंत्री की ओर से स्पष्ट खंडन की मांग कर रहे थे। तय किया गया कि बार का एक प्रतिनिधि कानून मंत्री से मिलेगा और इस मामले पर स्पष्ट वार्ता की जाएगी।
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यह भी निर्णय लिया गया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वकीलों द्वारा की जा रही अवैधानिक हड़ताल को समाप्त करने के लिए मुख्य न्यायाधीश से हस्तक्षेप से मांग की जाएगी। अवैधानिक हड़ताल के खिलाफ चीफ जस्टिस कार्रवाई करे। स्थानीय सांसदों, विधायकों से भी साथ लाने के लिए आम सभा प्रस्ताव पास किया गया। आम सभा में वरिष्ठ अधिवक्ता टीपी सिंह, आरके ओझा, वीपी श्रीवास्तव, अध्यक्ष राकेश पांडेय, पूर्व महासचिव अनिल तिवारी, महासचिव सीपी उपाध्याय, बार के पदाधिकारीगण, अधिवक्ता अजय कुमार मिश्र, कुश कुमार पांडेय आदि मौजूद थे। यूथ लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज दुबे की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी हाईकोर्ट के विभाजन का विरोध किया गया। बैठक में सचिव कृष्णकांत पांडेय सहित अखिलेश मिश्र,रमेशनारायण पांडेय आदि मौजूद थे।

हाईकोर्ट वकीलों के समर्थन में कचहरी के अधिवक्ता भी न्यायिक से विरत रहे। जिला अधिवक्ता संघ के मंत्री देवेंद्र मिश्र नगरहा ने बताया कि हाईकोर्ट इलाहाबाद का गौरव है। इसका विभाजन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा इसलिए कचहरी के वकील भी साथ हैं। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, बोर्ड ऑफ रेवेन्यू के वकील भी हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं के साथ रहे।

हाईकोर्ट की खंडपीठ पूर्वांचल में बनाने की मांग की जा रही है। अधिवक्ता रवींद्र सिंह, चंद्रहास सिंह परिहार, उदय शंकर तिवारी ने कहा है कि शीघ्र ही इस संबंध में एक समिति बनाकर प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा जाएगा। पूर्वांचल के वादकारियोें को पश्चिम के लोगों की तुलना अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है इसलिए वहां खंडपीठ बनाना अधिक जरूरी है।
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