संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में पिछले दो वर्षों के दौरान संगम नगरी की स्थिति संतोषजनक थी लेकिन इस बार कोई विशेष उपलब्धि खाते में नहीं आई। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया में लगातार कुछ न कुछ परिवर्तन होते रहते हैं लेकिन छात्र समय के साथ खुद को अपडेट नहीं कर पा रहे। व्यवस्थित रूप से तैयारी न होने के कारण मुख्य परीक्षा में ही झटका लग जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिविल सेवा परीक्षा में सवालों में दोहराव बहुत कम होता है। पेपर में हर साल कोई न कोई परिवर्तन नजर आता है। दिल्ली के कोचिंग संस्थान एवं अन्य शिक्षण संस्थान समय-समय पर खुद को अपडेट करते रहते हैं और छात्रों को भी नई चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करते हैं। प्रयागराज में ज्यादातर छात्र विषय को केंद्र में रखकर तैयारी करते हैं और निबंध, भाषा पर उनका कोई कमांड नहीं होता है। ऐसे में प्रारंभिक परीक्षा में तो यहां के छात्र सफल हो जाते हैं लेकिन मुख्य परीक्षा या इंटरव्यू में भाषा उन राह में सबसे बड़ी बाधा बन जाती है।
सिविल सेवा परीक्षा में पेपर सेटिंग, मूल्यांकन जैसे कार्य ज्यादातर दक्षिण भारत के विशेषज्ञों के पास चले गए हैं। ऐसे में हिंदी के साथ अंग्रेजी भाषा पर भी कमांड बहुत जरूरी है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. मनमोहन कृष्ण का मानना है कि दिल्ली के कोचिंग संस्थान प्रमुख शिक्षण संस्थानों के विषय विशेषज्ञों को अपने यहां बुलाते हैं। वहां प्रारंभिक परीक्षा से लेकर इंटरव्यू तक की तैयारी प्रोफेशनल तरीके से कराई जाती है जबकि प्रयागराज में ज्यादातर कोचिंग संस्थान ऐसे हैं, जहां एक ही शिक्षक कई अलग-अलग विषयों का विशेषज्ञ होकर पढ़ाता है। किसी का सेलेक्शन नहीं हुआ तो वह कोचिंग में पढ़ाने लगता है। यही वजह है कि सिविल सेवा परीक्षा में चयन कर लक्ष्य लेकर चलने वाले ज्यादातर छात्र इंटर या स्नातक के बार दिल्ली चले जाते हैं और प्रयागराज में परिणाम का स्तर लगतार गिरता जा रहा है।