पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट की बेंच बनाने के विरोध में हाईकोर्ट वकीलों की लड़ाई लंबे आंदोलन में तब्दील हो सकती है। रविवार को आयोजित महापंचायत में मंथन इसी बात पर हुआ कि बिना न्यायिक कार्य प्रभावित किए किस प्रकार से आंदोलन को गति दी जा सकती है। आंदोलन को सतत रूप से जारी रखने के क्या-क्या तरीके हो सकते हैं। वकीलों को पूर्वी जिलों, बुंदेलखंड और रूहेलखंड के जिलों से भी समर्थन मिल रहा है, इसने उनके उत्साह में वृद्धि की है।
महापंचायत में अधिकांश लोग इसी बात पर एक मत थे कि आंदोलन का स्वरूप उग्र या हिंसक रखने के बजाए बौद्धिक तरीके से इसे निरंतर चलाया जाए। वकीलों की एक कमेटी हाईकोर्ट की संवैधानिक स्थिति का विधिवत अध्ययन कर यह मत बनाने का प्रयास करेेगी कि विभाजित न्यायपालिका न जनता के हित में है और न ही अधिवक्ताओं के हित में। हाईकोर्ट के कई टुकड़े कर देने से इसकी शक्ति क्षीण होगी जो न्याय हित में नहीं होगा। विभाजन का समर्थन कर रही दिल्ली के लॉ फर्म्स और कुछ बडे़ वकीलों को दिल्ली के नजदीक बेंच होने से सीधा फायदा मिलेगा। उनकी फीस अधिक है जिससे वादकारियों के न्याय सस्ता होने के बजाए और महंगा हो जाएगा। स्थानीय वकीलों को भी इनकी वजह से कोई लाभ नहीं मिलने वाला है।
बार की कोशिश है कि इस सच्चाई को राजनीतिक दलों और नेताओं के सामने उजागर किया जाए। संवैधानिक रूप से भी इलाहाबाद हाईकोर्ट का विभाजन या क्षेत्राधिकार परिवर्तन एक जटिल प्रक्रिया होगी। वकील इस तथ्य को भी मजबूती से सामने लाने की कोशिश करेंगे। यह प्रक्रिया सतत रूप से जारी रहेगी ताकि बेंच विभाजन की कोशिशों को माकूल जवाब दिया जा सके। महापंचायत में कुशीनगर, मुरादाबाद मंडल बरेली, गोरखपुर, आजमगढ़, मऊ, बदायूं, झांसी, एटा, पीलीभीत, देवरिया, चित्रकूट, प्रतापगढ़ सहित 31 अधिवक्ता संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। बार के सचिव सीपी उपाध्याय के मुताबिक उनको 58 अधिवक्ता संगठनों से समर्थन पत्र मिल चुका है। इलाहाबाद और कौशांबी के सांसद दिल्ली में होने के कारण महापंचायत में शामिल नहीं हो सके मगर उनके मैसेज और समर्थनपत्र बार एसोसिएशन को प्राप्त हुए हैं। इसी प्रकार से अन्य तमाम विधायकों और नेताओं से समर्थन पत्र हासिल हुआ है।
महापंचायत में पारित हुए ये प्रस्ताव
1- ‘एक प्रदेश-एक हाईकोर्ट’ के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा।
2- लॉ फर्म्स, बड़े वकीलों और कुछ राजनेताओं की साजिश का विरोध होगा।
3- हाईकोर्ट बंटवारे/क्षेत्राधिकार परिवर्तन का सामाजिक, राजनीतिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
4- एक प्रतिनिधि मंडल राजनेताओं, प्रमुख व्यक्तियों, बुद्धिजीवियों को संवैधानिक स्थिति से अवगत कराएगा।
5- सांसद केशव प्रसाद मौर्या द्वारा 50 सांसदों का समर्थन जुटाने जैसा प्रयास आगे भी जारी रखा जाएगा।
6- महापंचायत में करीब 4000 लोगों ने पंजिका पर हस्ताक्षर कर समर्थन जताया है। इसे और आगे बढ़ाया जाएगा।
7- एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उनको संवैधानिक स्थिति से अवगत कराएगा।
8- बेंच विभाजन का हर स्तर पर विरोध होगा, जरूरत पड़ी तो वोट पर भी चोट होगी।