चाहे माघ मेला हो अथवा कुंभ आयोजन, अखाड़ों, साधु-संत एवं कल्पवासियों के साथ प्रयागराज की दो कंपनियां इस आयोजन में रच-बस चुकी हैं। तंबु नगरी के तौर पर दुनिया में पहचानी जाने वाली कुंभनगरी को आकार देने का करीब 70 फीसदी काम लल्लू जी एंड संस के पास है।
कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर निखिल अग्रवाल के मुताबिक वाराणसी से प्रयागराज आने के बाद उनके पूर्वज बाल गोविंद दास अग्रवाल उर्फ गुल्ली बाबू ने अपने पिता बैजनाथ दास अग्रवाल उर्फ लल्लू जी के नाम से 1918 से मेले में टेंट लगाने का काम शुरू किया। वर्ष 1932 में लल्लू जी एंड संस नाम से कंपनी पंजीकृत कराई। उस समय की डीड कॉपी परिवार के पास आज भी मौजूद है। उसके बाद से यह काम पीढ़ी दर पीढ़ी चल रहा है।
गुल्ली बाबू के बाद अब पांचवीं पीढ़ी इस काम को संभाल रही है। परिवार ने इसका दस्तावेजीकरण तो नहीं किया लेकिन, कंपनी के पास जो कुछ पुराने रिकॉर्ड हैं उसके मुताबिक आजादी के बाद तक काफी छोटे स्तर पर मेला होता था। अब कई गुना विस्तार हो चुका। पिछली बार (3200 हेक्टेअर) के मुकाबले मेला क्षेत्रफल करीब 800 हेक्टेअर बढ़ गया। ऐसे में टेंट आदि वस्तुओं की मांग बढ़ गई। कंपनी को डेढ़ साल पहले तैयारी आरंभ करनी पड़ी। असम से बांस मंगवाए गए, कर्नाटक से बल्लियां आईं। स्थानीय मार्केट में पर्याप्त कपड़ा न होने से सेलम (तमिलनाडु) से इसे मंगवाना पड़ा। सभी गोदामों में पिछले डेढ़ साल से दोनों पालियों में काम चलता रहा।
83 साल से एक ही कंपनी की गूंज
प्रयागराज में होने वाले माघ मेला अथवा कुंभ मेले के दौरान पिछले करीब 83 साल से आशा एंड कंपनी के साउंड सिस्टम की आवाज ही पूरे मेले में गूंजती है। चाहे पुलिस कंट्रोल रूम हो अथवा भूले-बिसरे केंद्र का प्रसारण उसके लिए दशकों से कंपनी के लगाए लाउड स्पीकर ही काम आते हैं। आशा एंड कंपनी संचालक के मुताबिक वर्ष 1942 में कंपनी ने चार लाउडस्पीकर के सहारे कुंभ से अपने काम की शुरुआत की थी। उसके बाद से सफर आगे बढ़ता गया। अब कंपनी के पास हजारों लाउडस्पीकर हैं। इनकी मदद से महाकुंभ, कुंभ एवं प्रत्येक वर्ष लगने वाले माघ मेला में इसी कंपनी का साउंड सिस्टम कई किमी के क्षेत्र में लगता है। इससे ट्रैफिक डायवर्जन समेत अन्य महत्वपूर्ण संदेश प्रसारित किए जाते हैं।
फाइव स्टार होटलों को भी मात देते रहे कॉटेज
कुंभनगरी में आचार्य महामंडलेश्वर समेत कई साधु-संतों के पंडाल ऐसे रहे जो सुविधा के मामले में फाइव स्टार होटलों को भी मात देते दिखे। संतों के पंडालों में वेटिंग हॉल, मॉडर्न टॉयलेट, वुडन फर्नीचर, ड्रॉइंग रूम, टीवी, हीटर, इलेक्ट्रिकल ब्लैंकेट, इंटरकॉम, वाई-फाई, सोफा, चेयर, डिजाइनर फ्लावर्स पॉट समेत अन्य आरामदायक वस्तुएं भी उपलब्ध कराई गईं। ठंड को देखते हुए टेंट में ऑयल हीटर भी दिए गए।