ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड संक्रमण का खतरा तेजी से बढ़ा है। इसके विपरीत तहसीलों के क्वारंटीन सेंटर खाली हैं। ग्रामीण सेंटर में जा ही नहीं रहे। खास यह कि कई गांवों में बाहर से आने वालों को गांव में प्रवेश नहीं दिए जाने के मामले भी सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद क्वारंटीन सेंटर में सन्नाटा चौंकाने वाला है।
दूसरे राज्य या जिले से आने वालों को क्वारंटीन करने का प्रावधान है। कोविड के लक्षण तथा संक्रमित के परिजनों को भी क्वारंटीन किया जाना है। इसे सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की ओर से हर तहसील में एक-एक क्वारंटीन सेंटर बनाया गया है लेकिन सभी केंद्र खाली हैं। जबकि, ज्यादातर गांवों में बाहर से आने वालों की बड़ी संख्या है। इनमें महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली से आने वाले भी शामिल हैं लेकिन क्वारंटीन होने के बजाय ये लोग गांवों में खुलेआम घूम रहे हैं।
न तो घरों में लोग क्वारंटीन हैं और न ही सेंटर पहुंचे। गांवों में संक्रमण फैलने के पीछे पंचायत चुनाव के अलावा इसे भी मुख्य वजह माना जा रहा है। इतना ही नहीं गांवों में संक्रमण का खतरा बढ़ने के बाद भी हालात वैसे ही हैं। मऊआइमा, शंकरगढ़, उरुवा आदि ब्लॉक के कई गांवों में 25 से भी अधिक लोग संक्रमित हैं या उनमें कोविड के लक्षण हैं। इनमें से ज्यादातर के घरों में संक्रमितों तथा अन्य संदिग्धों को अलग रखने की व्यवस्था नहीं है।
नतीजतन जांच में पॉजिटिव आने वाले तो घर में हैं लेकिन संपर्क में आने वाले परिवार के अन्य सदस्य खुलेआम घूम रहे हैं और क्वारंटीन सेंटर खाली हैं। सोरांव के बीआरसी सेंटर पर शनिवार को सिर्फ एक व्यक्ति क्वारंटीन था। यही स्थिति मेजा, हंडिया तहसील के क्वारंटीन सेंटर की भी रही। जबकि, शासन का निर्देश है कि संदिग्ध लोगों को चिह्नित कर क्वारंटीन किया जाए।
सामुदायिक किचन भी चालू नहीं
तहसीलों में बने क्वारंटीन सेंटर मेें सामुदायिक किचन की भी व्यवस्था की गई है लेकिन वे भी चालू नहीं हो पाए। एडीएम वित्त एवं राजस्व एमपी सिंह का कहना है कि क्वारंटीन सेंटर में लोग नहीं आ रहे। इसकी वजह से सामुदायिक किचन भी चालू नहीं रहता। पूरे जिले में प्रशासन की तरह से सिर्फ गंगोत्री गार्डेन स्थित सामुदायिक किचन ही संचालित हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में कोई सामुदायिक किचन संचालित नहीं हो रहा।
मंडलायुक्त बनाए गए नोडल अधिकारी
कोविड गाइडलाइन का पालन तथा संक्रमितों का इलाज सुनिश्चित कराने के लिए हर जिले में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। प्रयागराज में मंडलायुक्त संजय गोयल को नोडल नियुक्त किया गया। नोडल अधिकारी, निगरानी समितियों, सैनिटाइजेशन, सफाई, संक्रमितों, होम आइसोलेशन एवं क्वारंटीन में रहने वालों को मिलने वाली सुविधाओं का आदि की रोजाना समीक्षा करेंगे। रिपोर्ट शासन को भी भेजी जाएगी।
न्याय पंचायत स्तर पर नियुक्त किए गए सेक्टर मजिस्ट्रेट
कोविड संक्रमण का खतरा बढ़ने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी तथा सख्ती बढ़ा दी गई है। इसी क्रम में न्याय पंचायत स्तर पर सेक्टर मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति का निर्णय लिया गया है। इस तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में 214 सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात होंगे। शहरी क्षेत्र में 100 सेक्टर मजिस्ट्रेट पहले से नियुक्त हैं। यानी, कोविड संक्रमण की नियंत्रण की दृष्टि से पूरे जिले को 314 सेक्टर में विभाजित किया गया है।
सीडीओ शिपू गिरी की अध्यक्षता में शनिवार को हुई बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड संक्रमण पर नियंत्रण को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। सफाई, सैनिटाइजेशन, संक्रमितों के इलाज आदि की बिंदुवार समीक्षा की गई। इसी क्रम में सीडीओ ने हर न्याय पंचायत सेक्टर मजिस्ट्रेट की नियुक्ति का निर्देश दिया।
सेक्टर मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में टीम होगी जो, कोविड गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा जिले से लेकर गांव स्तर तक निगरानी समिति का गठन कर अफसरों की जिम्मेदारी भी तय की गई। बैठक में डीपीआरओ रेनू श्रीवास्तव समेत अनेक अफसर मौजूद रहे। गांवों में अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की भी नियुक्ति कर ली गई है। शनिवार को सभी प्रतापपुर, हंडिया, सैदाबाद, कौंधियारा आदि ब्लाक में सफाई अभियान चलाया गया।