इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी वैधानिक नियमों के तहत काम कर रहे मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में हस्तक्षेप करने की न्यायालयों की धिकारिता सीमित है । अदालतों को ऐसे मामलों में पूरी सावधानी और परिस्थितियों विचारों के बाद ही हस्तक्षेप करना चाहिए। अन्यथा पूरी नियुक्ति प्रक्रिया में व्यवधान पड़ सकता है।
मोहम्मद अरशद खान की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति एके श्रीवास्तव की पीठ ने दिया है।\n याची 2015 की पुलिस कांस्टेबल भर्ती में शामिल हुआ था । भर्ती बोर्ड द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड ने उसे फ्लैट फीट के आधार पर अनफिट घोषित कर दिया ।इसे उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने याची की अलग मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच करवाई । दोबारा गठित बोर्ड ने भी याची में वही कमी पाई और उसे अनफिट करार दिया । मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को भी अदालत में चुनौती दी गई जिसे एकल पीठ ने खारिज कर दिया ।इस आदेश के खिलाफ विशेष अपील दाखिल की गई। \nअपील पर सुनवाई करते हुए पीठ का कहना था कि हालांकि अनुच्छेद 226 में अदालतों को असीमित अधिकारिता है मगर मेडिकल बोर्ड के निष्कर्षों में इसका उपयोग करते समय परिस्थितियों को देखते हुए सावधानी पूर्वक ही अधिकारों का उपयोग करना चाहिए।
भर्ती बोर्ड द्वारा मेडिकल परीक्षण निर्धारित वैधानिक नियमों के तहत प्रक्रिया को अपनाते हुए कराया जाता है ।ऐसे में इस में हस्तक्षेप करने से पूरी भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होगी। याची द्वारा दाखिल अपील में दुबारा कराए गए मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में कोई खामी नहीं बताई गई। एकल पीठ के आदेश में भी किसी प्रकार की अवैधानिक ता नहीं है। इस स्थिति में अपील को पोषणीय न पाते हुए अदालत ने खारिज कर दिया।