कुंभ मेला क्षेत्र शहरियों के लिए इन दिनों चौपाटी जैसा बन गया है। शाम होते ही संगम नोज पर अंधेरा और सन्नाटा छा जाता था लेकिन अब शहर के लोग शाम होने के बाद ही संगम नोज पहुंच रहे हैं। गंगा किनारे की रौनक बढ़ने लगी है। हर तरफ लाइटों से झिलमिलाती संगम की रेत लोगों को काफी आकर्षित कर रही है।
भीड़ बढ़ने के कारण संगम पर खान-पान की दुकानें भी सजने लगी हैं। बच्चों के लिए तो यह जगह पिकनिक स्पॉट जैसी हो गई है। कुंभ के दौरान वहां पैर रखने की भी जगह नहीं होगी, शहर के लोग यह बात अच्छी तरह से जानते हैं, सो ज्यादातर लोग इस मौके को छोड़ना नहीं चाहते।
कुंभ मेला क्षेत्र में दस हजार स्ट्रीट लाइटें लगाई जानी हैं और इनमें से आधी लग चुकी हैं। बांध से संगम नोज तक पहुंचने के लिए इंटरलॉकिंग वाली तमाम सड़कों का निर्माण करा दिया गया है। मेला क्षेत्र में कुल 18 पांटून पुल बनाए जाने हैं, जिनमें से एक बनकर तैयार हो चुका है। संगम नोज स्ट्रीट लाइटों से जगमगाने लगा है। वहां का नजारा चौपाटी जैसा हो गया है। शाम होते ही वहां शहरियों की भीड़ लग जा रही है।
बच्चों के लिए पिकनिक स्पॉट बना संगम नोज चुरमुरा, चना बेचने वालों के लिए भी अच्छा-खासा मुनाफा कमाने वाला बाजार बन गया है। अब संगम पर बने मंदिरों में भी देर रात तक चहल-पहल रहती है। ठंड शुरू हो जाने से अब दिन में संगम नोज पर भीड़ जुटने लगी है, सो गंगा तट पर अक्सर खूंटे से बंधीं रहने वालीं खाली नौकाएं भी अब सवारियों से भरी रहती हैं।