विश्व हिंदू परिषद की तरफ से आयोजित धर्म संसद में आने के लिए कई संतों को आमंत्रण पत्र भेजा गया, फिर वे इसमें शामिल होने नहीं गए। कुछ इसकी वजह बता रहे है, तो कुछ के पास इसकी कोई वजह नहीं है। शंकराचार्य अधोक्षजानंद सरस्वती ने बताया कि उन्हें करीब 10 दिन पहले धर्म संसद के लिए आमंत्रण पत्र आया था। कहा कि वह धर्म संसद में नहीं जाना चाहते हैं, इसकी वजह बताने से इंकार कर दिया।
इसी तरह प्रखर महाराज ने बताया कि उनके पास भी विहिप के पदाधिकारी आमंत्रण पत्र लेकर आए थे लेकिन, वह धर्म संसद में शामिल नहीं हुए। उनका कहना है कि वह नहीं जाना चाहते हैं महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रनंद गिरी ने बताया कि पिछली बार उन्हें कुंभ में विहिप की धर्म संसद के लिए आमंत्रण पत्र भेजा गया था।
वह इसमें शामिल होने गए भी थे लेकिन, इस बार उन्हें बुलाया नहीं आया। उनका कहना है कि विहिप अवसरवादी लोगों के हाथ में खेल रही है, इसी वजह से वह संतों गुट बनाकर काम कर रही है। रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य ने बताया कि उन्हें निमंत्रण मिला था, वह गए भी थे। उनका कहा है कि संतों को राम मंदिर के मुद्दे पर एक जुट होकर आवाज उठानी चाहिए। इसके लिए धर्म संसद में उपस्थिति रहेगी तो अच्छा रहेगा।