न कोई ओर न छोर। सहसा सबकुछ ठहर सा गया। चहुंदिश सिर्फ सिर ही सिर। विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक समागम में कुंभ के दूसरे स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर ऐसा ही दृश्य था। पावन त्रिवेणी तट पर आस्था का ऐसा जनसमुद्र पहले नहीं देखा गया था।
भक्ति भाव की लहरों में सारे तटबंध टूट गए। जल, थल, नभ से कड़ी निगरानी के बीच मौनी अमावस्या की दिन रात डुबकी लगती रही। कुंभ मेला प्रशासन के अनुसार शाम तक देश-दुनिया के हर कोने के पहुंचे पांच करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम समेत 41 घाटों पर पुण्य की डुबकी लगाई।
भीड़ की वापसी होने के साथ ही रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों के बाहर लाखों की तादाद में श्रद्धालुओं के पहुंचने से तीर्थराज प्रयाग के मुख्य मार्गों पर यातायात ठहर सा गया है।