इस बार का कुंभ श्रद्धालुओं की संख्या के मामले में भी अद्वितीय रहा। मौनी अमावस्या स्नान पर्व तो पिछले सारे रिकार्ड टूट गए। बाकी स्नान पर्वों पर भी आस्था के महासमुद्र में हिलोरें गगनचुंबी रहीं। साफ है कि कुंभ की ब्रांडिंग सफल रही, तभी उम्मीद से ज्यादा श्रद्धालु जुटे। करोड़ों देसी विदेशी भक्त इस विश्व स्तरीय आयोजन के साक्षी बने। चलो, चलें कुंभ, दिव्य कुंभ-भव्य कुंभ, करो कुंभ का गान, रहे अतिथि का मान जैसे स्लोगन श्रद्धालुओं को संगम की रेती तक खींच लाने का माध्यम बनें। सरकार का दावा था कि भीड़ जुटेगी लेकिन अप्रत्याशित श्रद्धालुओं की भीड़ ने पूर्वानुमान ध्वस्त कर दिए।
कुंभ मेले की औपचारिक शुरुआत 15 जनवरी से हुई। 49 दिन के इस मेले में हर स्नान पर्व पर एक दिन पहले ही संगम तट को जाने वाले सभी रास्तों पर ठसाठस भीड़ रही। हर कदम पुण्य की डुबकी लगाने को आतुर होकर बढ़ते रहे। पहले ही शाही स्नान पर्व पर आंकड़ा दो करोड़ से पार होकर रात तक 2.20 करोड़ दर्ज किया गया। 21 फरवरी को पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर भी नए रिकार्ड बने। कल्पवास का आरंभ होने के इस दिन स्नानार्थियों की संख्या 1.07 करोड़ दर्ज की गई।
मौनी अमावस्या कुंभ का दूसरा शाही स्नान पर्व रहा। दो दिन पहले से शहर की सीमाएं सील कर दी गईं। 94 पार्किंग स्थल पैक रहे। शहर की सड़कों पर सिर्फ सिर ही सिर दिख रहे थे। संगम क्षेत्र की अद्वितीय छटा के बीच 40 घाटों पर पांच करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने पुण्य कामना से डुबकी लगाई।
कुंभ के तीसरे शाही स्नान पर्व वसंत पंचमी पर भी 1.70 करोड़ श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। चार फरवरी को इस पर्व पर भीड़ का प्रवाह चौंकाने वाला रहा। फिर 19 फरवरी को माघी पूर्णिमा पर भी सवा करोड़ स्नानार्थियों ने जहां पुण्य अर्जन को डुबकी लगाई वहीं कल्पवासियों ने पूर्णता के लिए डुबकी लगाई। चार मार्च को अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि पर भी श्रद्धालुओं की संख्या एक करोड़ पार कर गई। प्रशासन का दावा है कि सोमवार को 1.10 करोड़ लोगों ने संगम और गंगा तटों पर डुबकी लगाई। भीड़ आने का क्रम अनवरत जारी है।
कुंभ मेले के 49 दिन के विश्व स्तरीय आयोजन में जनसंख्या के लिहाज से दुनिया में पांचवें और छठे क्रम के ब्राजील और पाकिस्तान से अधिक रहे। आंकड़ों में ब्राजील की जनसंख्या करीब 21 करोड़ और पाकिस्तान की 20 करोड़ दर्ज है। चार मार्च को कुंभ मेला प्रशासन की ओर से जारी आंकड़े बताते हैं कि कुंभ में 25.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया। प्रतिदिन आठ से दस लाख लोगों ने पुण्य की डुबकी लगाई।
इसमें कोई दो राय नहीं इस बार कुंभ में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अफसरों का दावा है कि क्राउड एनलेटिक कैमरों से भीड़ की गणना की गई। यह भी तथ्य है कि इस गणना के प्रशासनिक आंकड़ों की कोई वैज्ञानिक प्रमाणिकता नहीं है। वहीं कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद का कहना है कि फूलप्रूफ और हाईटेक तरीके से भीड़ का सटीक आंकलन किया गया। उन्होंने बताया कि कैमरों से हेड मैपिंग, स्नान के घंटे, आठ किलोमीटर विस्तार के घाटों पर जुटे लोगों को गणना का आधार बनाया गया। प्रशासन का दावा है कि मेले में आने के लिए श्रद्धालुओं ने खुद की सवारी को तवज्जो दी। विभिन्न क्षेत्रों में 94 पार्किंग स्थल, बस और ट्रेेनें ठसाठस रहीं।