प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान संतों ने राम मंदिर पर जल्द फैसला आए, इसके लिए केंद्र सरकार से भी जरूरी कदम उठाने की मांग की। विहिप नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा अयोध्या में गैरविवादित जमीन वापस दिए जाने की अर्जी दिए जाने का स्वागत किया। अयोध्या मामले की सुनवाई में देरी, राम सेतु के अस्तित्व पर सवाल उठाने आदि बिंदुओं को लेकर संतों के निशाने पर कांग्रेस, वामपंथी संगठन समेत अन्य दल भी रहे।निर्वाणी अखाड़ा के सचिव गौरीदास ने कहा कि कुछ लोग हिंदू समाज को बांटने के लिए अयोध्या कूच की बात करते हैं।
यह राम मंदिर के लिए बलिदान देने वालों के साथ मजाक है। अखिलेश्वरानंद ने कहा कि कुछ दलों को लाभ पहुंचाने के लिए किया ऐसा जा रहा है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी गर्भगृह पर भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर राम मंदिर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखा दी है। उन्होंने प्रस्ताव के हर बिंदु का अनुमोदन किया। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद, निर्मोही अखाड़ा के सचिव रामजीदास आदि संतों ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया। धर्म संसद में माधवाचार्य विश्वरतीर्थ, स्वामी कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार, केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे, विनायक राव, चंपत राय जीवेश्वर मिश्र समेत बड़ी संख्या में संत और विहिप कार्यकर्ता शामिल रहे।
प्रस्ताव के प्रमुख बिंदु
1. मंदिर निर्माण में बाधा उत्पन्न करने वाले माने जाएंगे राष्ट्रद्रोही
2. देश में कहीं भी बाबर के नाम पर नहीं बनाने देंगे मस्जिद
3. फिलहाल छह माह तक कोई आंदोलन नहीं किया जाएगा
4. अखाड़ा परिषद तथा अन्य संतों के अयोध्या कूच की घोषणा की निंदा
5. चलेगा जागरण अभियान, आज संगम पर जमावड़ा
6. छह अप्रैल को होगा 13 करोड़ राम नाम का जाप
7. संघ प्रमुख ने प्रस्ताव के हर बिंदु का किया अनुमोदन
8. मोदी-योगी पर जताया भरोसा, अन्य दलों पर हमलावर रहे संत