संगम तीरे सड़ती पुआल, गंगा जल में फैले चढ़ावे के फूलों ने संगम नोज पर टिकना मुश्किल कर दिया है। हर ओर गंदगी और सड़ती पुआल से फैल रही दुर्गंध से लोगों परेशान हो गये हैं। गंगा में बाहरी गंदगी और फूलों के सडऩे से गंगा का किनारा दूषित हो गया। पर आस्था के चलते लोंगो ने गंगा स्नान किया। हालांकि तट पर सीमेंट बोरियों के चलते स्नानार्थियों को राहत रही।
बीते मकर संक्रांति, पौष पूर्णिमा और मौनी अमावस्या के शाही स्न्नान के बाद मेला क्षेत्र में जाम की समस्या समाप्त हो गई। फिर गाडिय़ों कल्पवासियों और स्थानीय लोंगो के नहाने का क्रम संगम नोज पर बढऩे लगा। लोग चार पहिया से लेकर दो पहिया वाहन घाटों लेकर पहुंचने लगे और खुले में कपड़े बदलने लगे है।
इससे वहां पर बिखरे पुआल भीगकर सडऩे लगा साथ इसका दुर्गंध क्षेत्र में फैलने लगा। लोग मुंह बंद गंगा स्नान करने लगे। यहां तक गंगा का किनारा भी गंदगी की चपेट में आ गया। मांडा के रहने वाले दिनेश कुमार चौधरी का कहना है कि मेला में गाडियों के आने से काफी लोगों को तकलीफें हुई। यहीं नहीं घाटों की दुर्दशा हुई। कोई घाट साफ सुथरा नहीं रह गया है। गंगा का पानी भी गंदा हो गया। जो नहाने योग्य नहीं रह जा रहा है।