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कुंभ 2019: हर मर्ज की दवा है यहां, कई राज्यों से आए सपनों के सौदागरों ने डाला डेरा

Sat, 26 Jan 2019 05:21 PM IST
shubham आदर्श त्रिपाठी, अमर उजाला, प्रयागराज
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बनते काम बिगड़ जाते हैं, आप पर शनि ग्रह का दोष है। चिंता मत कीजिए। यह लीजिए काले घोड़े की नाल से बनी अंगूठी। महज 10 रुपये कीमत। पहनिए और देखिए कैसे बदलती है किस्मत। 

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बाबूजी, कोयला या तारकोल नहीं, यह असली शिलाजीत है। खाते ही शरीर में जोश और जवानी का असर दिखना शुरू हो जाएगा। कुंभ मेले में नेपाल से स्पेशल मंगवाई है। सिर्फ 30 रुपया तोला (10 ग्राम) दाम हैं।


यह दो उदाहरण भर मात्र हैं। कुंभ मेला क्षेत्र में आपकी मुश्किलें चुटकी में हल कर देने का सपना दिखाने वालों ने अपनी दुकानें सजा रखी हैं। एक से बढ़कर एक दावे। इसमें किस्मत बदलने से लेकर शरीर की हर बीमारी का इलाज तक शामिल है। आठ-10 मुंह वाले रुद्राक्ष और उनकी मालाएं, हाथी दांत के कड़े, कस्तूरी मृग की नाभि, काले-लाल कपड़े वाले ताबीज, तरह-तरह के रत्न और आपकी किस्मत बदलने वाली ऐसी तमाम चीजें। कुछ की कीमत तय तो कुछ की आपके  मोलभाव करने के कौशल पर निर्भर है। इसी तरह, केसर, शिलाजीत, हींग, चंदन, अश्वगंधा, चंदन, सिंदूर की दुकानें खूब सजी हैं। 

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रोजाना 10 लाख का कारोबार

इन चीजों से किस्मत भले ही न बदले लेकिन, इन वस्तुओं के विक्रेताओं की चांदी जरूर हो गई है। नेपाल, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात से आए लोगों के साथ स्थानीय लोगों ने भी ऐसी वस्तुएं बेचनी शुरू कर दी हैं। एक अनुमान के मुताबिक पूरे मेला क्षेत्र में 1000 से अधिक ऐसी दुकानें हैं। खरीदारों में ग्रामीण, बुजुर्गों के साथ बड़ी संख्या में युवा भी शामिल हैं। रोजाना 10 लाख रुपये से अधिक का कारोबार होने का अनुमान है।

मध्यप्रदेश के खंडवा से रुद्राक्ष बेचने आए चंदन ने बताया कि पूरे गांव से बड़ी संख्या में लोग सामान बेचने के लिए आए हैं। नेपाल से रुद्राक्ष खरीदते हैं। माल खत्म होने पर फिर मंगा लेते हैं। 

असली होने की उम्मीद न करें
रत्न, अंगूठी आदि वस्तुओं की खरीदारी आपके विश्वास पर निर्भर करती है लेकिन, खाद्य पदार्थों को असली मानने की भूल न करें। एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शिलाजीत नकली है। इस कीमत पर असली शिलाजीत नहीं मिलती है। लोग खरीदते हैं, इसलिए बेच रहे हैं। नेपाल से आए लोग इसे देते हैं। केसर, हींग सब इलाहाबाद, कानपुर से खरीदते हैं।

आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. आशुतोष मालवीय ने बताया कि सबसे बड़ी बात यह है कि शिलाजीत कभी कच्ची नहीं खाई जाती है। इसे शुद्ध करना पड़ता है, इसकी प्रक्रिया जटिल है। लोग काली पोटीन मिलाकर नकली शिलाजीत बनाते हैं। इसका सेवन हारमोनल असंतुलन का कारण बनता है। किसी भी तरह की जड़ी-बूटी बिना चिकित्सकीय परामर्श के न तो खरीदनी चाहिए और न ही इसका सेवन करना चाहिए।
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