तीर्थपुरोहित आशुतोष ‘हरी मछली निशान’ के शिविर में कल्पवास कर रहे पंडित पीयूष कुमार मिश्र का कहना है कि त्रिजपा का शाब्दिक अर्थ तीन जप अर्थात तीन माह का जप है। इसके तहत पौष पूर्णिमा से कल्पवास की शुरुआत और माघ पूर्णिमा पर स्नान से दो माह की तिथियों पर तो डुबकी लग जाती है, पर तीसरे माह की तिथि पर स्नान के लिए फाल्गुन की द्वितीया तिथि पर स्नान की मान्यता है। ऐसे में बृहस्पतिवार को द्वितीया स्नान के साथ ही ‘त्रिजपा, त्रिजटा या त्रुटिजा’ की परंपरा और संकल्प पूरा होगा।
त्रुटि के निवारण को ही त्रिजपा
शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ कहते हैं, माघ में किए गए जप, तप, स्नान की परंपरा में हुई त्रुटि के निमित्त ही तीन तिथियों में अतिरिक्त स्नान की परंपरा है। त्रिजपा के माध्यम से उसी त्रुटि का निवारण है, जो जाने-अनजाने कल्पवास के दौरान संभव है। इसके बाद कल्पवास को पूर्णता मिलती है।