द्वाराचार्य डॉ. रामकमल वेदांती के खिलाफ अखिल भारतीय महर्षि साधु अखाड़ा परिषद के संतों ने सोमवार को जमकर नारेबाजी की। वाल्मीकि समाज के संतों ने वेदांती पर महर्षि वाल्मीकि के विरूद्ध मर्यादा के विपरीत टिप्पणी करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि ऋषि वाल्मीकि ने सनातन संस्कृति को स्थापित करने में अमूल्य योगदान दिया। उनकी भक्ति और साधना पूरी दुनिया के लिए प्रेरणादायी है। ऐसे संत को अपनी कथाओं में डाकू कहकर वेदांती ने वाल्मीकि समाज का अपमान किया है। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।
कथाओं में महर्षि वाल्मीकि पर दिए गए स्वामी वेदांती के बयान के खिलाफ वाल्मीकि अखाड़ा परिषद का अनशन सेक्टर 12 स्थित किन्नर अखाड़ा के सामने सोमवार की देर रात तक जारी रहा। संतों का कहना है कि ऋषि वाल्मीकि को अपमानित करना देश के संपूर्ण वाल्मीकि अनुयायियों का अपमान है। कुंभ मेले में दलित संतों की उपेक्षा को लेकर परेड में अखिल भारतीय वाल्मीकि साधु अखाड़ा परिषद् की ओर से चल रहा अनशन सोमवार को भी जारी रहा।
अखाड़ा परिषद् के महामंत्री सुनील राजदान, सहयोगी संस्था हेला समाज कल्याण संघ के महामंत्री कुंजन लाल भगत, स्वामी नित्यानंद महाराज, तीरथनाथ महाराज, संत साधुनाथ महाराज आदि अनशनरत हैं। भगवान वाल्मीकि को अपमानित किए जाने से भी भारी आक्रोश रहा। कुंभ मेले में उचित ढंग से भूमि और सुविधा न दिए जाने को लेकर भी भारी नाराजगी रही। भारद्वाज आश्रम या फिर परेड में वाल्मीकि की मूर्ति लगाने की भी मांग की गई। इस मौके पर सुनील राजदान, राममनोहर हेला, नित्यानंद जी महाराज, स्वामी श्रीनाथ महाराज, विनोद चंद्रा, बृजमोहनलाल हेला, मोहनलाल, रंजीत हेला, दुर्गा प्रसाद हेला, राजेंद्र कुमार, महामंडलेश्वर साध्वी कृष्णा, आनंद भारती आदि मौजूद रहे।
शोभायात्रा में रामानुजाचार्य की विशाल प्रतिमा भी रखी गई थी। इसके साथ ही कई ऊंट, घोड़े और हाथी शोभायात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे। पूरे रास्ते श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का भव्य स्वागत किया। नगर भ्रमण करते हुए शोभायात्रा संगम नोज पर पहुंची। यहां स्नान के बाद गंगा पूजन भी किया गया। इस मौके पर जगद्गुरू स्वामी घनश्यामाचार्य, स्वामी राघवाचार्य, स्वामी चंद्रभूषणाचार्य, स्वामी विश्वेश प्रपन्ननाचार्य,स्वामी वासुदेवाचार्य, स्वामी रामेश्वरचार्य, आचार्य जयराम आदि मौजूद रहे।