इस दौरान तय किया गया कि फैसले के इंतजार तक पूरे देश में राम नाम का जनजागरण चलाया जाएगा। लोगों में आक्रोश और आवेश जगाते रहने को भी संतों ने आवश्यक माना। साथ ही यह भी कहा गया कि इस बीच लोकसभा चुनाव भी आएंगे, ऐसे में यह सोचना होगा कि मंदिर कौन बना सकता है, उस पर ही भरोसा जताना होगा।
धर्म संसद के दूसरे व आखिरी दिन की कार्यवाही में सबसे पहले महामंडलेश्वर अखिलेश्वरानंद ने मंदिर निर्माण पर प्रस्ताव पढ़ा, जिसमें केंद्र सरकार की तरफ से गैर विवादित जमीन के लिए कोर्ट में लगाई अर्जी का स्वागत किया गया। मोदी सरकार को मोहलत देने की बात को आगे बढ़ाते हुए विहिप के केंद्रीय अध्यक्ष वीएस कोकजे ने कहा कि मंदिर निर्माण में देरी से सरकार पर गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन मोदी सरकार के बिना भी मंदिर का निर्माण संभव नहीं है।
इसी बीच धर्म संसद के प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताते हुए अयोध्या राम मंदिर न्यास पीठ के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास ने भी मोदी को फिर से सत्ता में लाने की वकालत की। उनका कहना था कि केंद्र की मोदी सरकार के सत्ता में रहने पर ही मंदिर निर्माण संभव है। उन्होंने संयत रहते हुए सरकार को चेतावनी वाले लहजे में कहा कि वह भक्तों, श्रद्धालुओं और संतों के आग्रह को पूरा करे। धर्म संसद में सर्वमान्य रूप से मोदी सरकार के पक्ष में माहौल बनाने का पूरा प्रयास हुआ। आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने भी संतों से पूर्ण धैर्य के साथ देश भर में जनजागरण करते रहने की अपील की।