ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के सानिध्य में संगम की रेती पर 28 से 30 जनवरी तक परम धर्मसंसद होगी। इससे पहले रविवार को संसद का संदेश देने के लिए प्रणामी यात्रा निकाली गयी। शंकराचार्य जी के प्रतिनिधि शिष्य प्रवर धर्माधीश स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी के नेतृत्व में हाथी, घोड़े, डमरू, शंखध्वनि के बीच निकली यात्रा में देश के समस्त संसदीय क्षेत्रों के धर्मांसद, विदेशों से आए प्रतिनिधि,बटुक शामिल हुए।
यात्रा शंकराचार्य शिविर सेक्टर नं 15 से आरंभ होकर तुलसी मार्ग पर सेक्टर नं 9 स्थित परमधर्मसंसद परिसर पहुंचकर पूरी हुई। पूरे रास्ते धर्म की जय हो, हर हर महादेव का जयघोष होता रहा। यात्रा का मुख्य आकर्षण अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर स्थापित होने वाली शिलाएं, ’नन्दा भद्रा जया और पूर्णा’ थी जिसे सिर पर रखकर भक्तों ने पैदल यात्रा की। शिविर पहुंचने पर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा, परमधर्मसंसद सबकी है क्योंकि यहां पर किसी भी दल, देश या भाषा का व्यक्ति हो, वह अपनी बात कह सकता है । यहां सभी को विचार रखने का अवसर रहेगा। कहा, मौजूदा सरकार खुले आसमान के नीचे राम जी का पुतला बना रही है जो आपत्तिजनक है ।
यदि हम राम जन्मभूमि पर मन्दिर निर्माण के लिए चलें तो हो सकता है हमें रोक दिया जाए, लेकिन हमें तब तक पीछे नहीं हटना है जब तक राम मंदिर का निर्माण न हो जाए। हमें कोई राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री नहीं बनना है। हमें बस अयोध्या में राम जन्मभूमि पर ही राम मन्दिर बनाना है । आर्य शेखर ने परमधर्मसंसद में शंकराचार्य जी को गंगा की सहायक नदियों का जल समर्पित किया । सिख समुदाय के चार तख्तों की ओर से राम जन्मभूमि पर मन्दिर निर्माण के लिए समर्थन मिला है यह कहते हुए कि गुरु गोविन्द सिंह जी ने राम जन्मभूमि के लिए प्रयास किया था । तीन दिन की परमधर्मसंसद में जो भी चर्चा होगी उसी के आधार पर निर्णय लिया जाएगा । इस दौरान गंगा रक्षा,राम जन्मभूमि,गौ रक्षा, मन्दिर रक्षा, पर्यावरण रक्षा,अन्न जल शुद्धि, विवाह संस्था रक्षा,तीर्थ मर्यादा रक्षा, धर्मान्तरण, संस्कृत शिक्षा, धर्म शिक्षा, हिन्दू पर्सनल ला, साहित्य व फिल्म शुद्धि, नकली देवता आचार्य, सनातनी दल आवश्यकता, धार्मिक हस्तक्षेप, कुम्भ मर्यादा रक्षा, चैरिटी एक्ट विरोध पर चर्चा होगी।