बीमारियों से लड़ने के लिए अब मेडिटेशन को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। काली मार्ग स्थित पंच दशनाम जूना अखाड़ा की महामंत्री (निर्माण व्यवस्था मंत्री) सहज योगिनी श्री शैलजा देवी के शिविर में विदेशों से आए कई श्रद्धालु भी मेडिटेशन का अभ्यास करते दिख जाएंगे।
उनके शिविर में रोज शाम पांच से सात बजे तक मेडिटेशन का अभ्यास कराया जाता है। सुशीला शर्मा बचपन से ही श्री शैलजा देवी की शिष्या हैं। सुशीला बहुत छोटी थीं, जब उनके मामा मिट्ठल लाल को ब्लड कैंसर हो गया था। मिट्ठल लाल ने ब्लड कैंसर से लड़ने के लिए मेडिटेशन को हथियार बनाया और बिना अस्पताल गए वह लगातार 40 वर्षों तक ब्लड कैंसर से लड़ते रहे। सुशीला की तरह अब गुजरात के राहुल जोशी, डिंपल, तारा और धर्मन भी मेडिटेशन में पारंगत हो चुके हैं और शिविर में इसके जरिये लोगों को इलाज करते हैं।
श्री शैलजा देवी मंत्र ‘हरिओम तत्सत जय गुरुदत्त’ और मेडिटेशन के के जरिये कॉस्मिक हीलिंग से शरीर के भीतर की निगेटिव एनर्जी को निकालकर पॉलिटिव एनर्जी का प्रवेश कराया जाता है और इससे सीवियर माइग्रेन, डायबिटीज, मुंह के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां तक ठीक हो रही हैं।
मेडिटेशन के बिना अधूरा है योग
उनका कहना है कि मंत्र का जप लोग घर में भी कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें शिविर तक आने की जरूरत नहीं। बकौल श्री शैलजा देवी 25 जनवरी से मेडिटेशन शिविर का विस्तार होगा, जब विदेशों से श्रद्धालु पहुंचेंगे।
उनके मुताबिक इस शिविर में शामिल होने के लिए विदेश से विलियम हॉवेल, बारबरा, अल्पेश पटेल, बीनल पटेल, अनिल अग्रवाल, अंजू अग्रवाल समेत 100 से अधिक श्रद्धालु आ रहे हैं।
मेडिटेशन के बिना योग अधूरा है, यह दावा है सहज योगिनी श्री शैलजा देवी का, जिन्होंने 40 साल तक मेडिटेशन में शोध किया। शैलजा देवी का दावा है कि उनका शोध सफल रहा और अब वह पूरी दुनिया में घूमकर मेडिटेशन के जरिये रोगों का उपचार कर रही हैं।