आम श्रद्धालुओं के लिए बनाए गए रैन बसेरे की सुविधा के दावे की कलई मौनी अमावस्या से पहले खुल गई। मौनी अमावस्या पर रैन बसेरे की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। दूर-दराज से आने वाले स्नानार्थियों को खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर होना पड़ा रहा है। इसके बावजूद आस्था से ओत-प्रोत स्नानार्थी संगम नोज पर परिवार के साथ रहकर रात बिता रहे हैं।
मौनी अमावस्या के पहले कुंभ की रेती पर संगम में डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। बस अड्डे से लेकर रेलवे स्टेशनों पर भीड़ खचाखच भरी हुई है। हर-हर गंगे का जयकारा लगाते हुए आस्था में डूबे श्रद्धालुओं को लंबी राह की कसक नहीं है। लेकिन मेला प्रशासन के रैन बेसेर की कमी इन्हें जरूर अखर रही है। सिर पर गठरी, हाथ में झोला लिए स्नानार्थी संत महंतों के पंडालों में ठोर ढूढने के लिए दिन भर भटकते रहे, लेकिन इन्हें भक्तों की जमघट के चलते जगह नहीं मिली।
इसके बाद मेला प्रशासन के रैन बसेरे की खोज में निकले। यहां से भी इन्हें यह कहकर लौटा दिया जा रहा है कि रैन बसेरे में जगह खाली नहीं है, सभी भर चुके हैं। सेक्टर चार में करीब एक-एक हजार बेड के सार्वजनिक विश्रामालय पूरी तरह भरे मिले। मेला प्रशासन के सभी रैन बसेरे बुक मिले। इस हालत में थक-हारकर स्नानार्थी अपने परिवार के साथ संगम नोज पर माघ की ठिठुरन में खुले आसमान के नीचे मजबूरी में रात बिताने को मजबूर दिखे।
मध्य प्रदेश के सीधी जिले से आए सुभाष तिवारी का कहना है कि यहां पहुंचने के लिए दस किलोमीटर चलना पड़ा। अब रात बिताने के लिए सेक्टर चार में सार्वजनिक स्थल पर गए तो वहां सभी हाल भरे मिले। वहां से निराश होकर संगम की रेती पर आए यहीं रात गुजार कर स्नान ध्यान करके लौट जाएंगे।
रैन बसेरे का भी व्यवसायीकरण
मेला के सेक्टर चार पर बने सार्वजनिक आश्रय स्थलों को मेला प्रशासन ने पूरी तरह व्यवसायिककरण कर दिया है। दो दिन तक इन श्रद्धालुओ से 100 रुपये प्रति यात्री और पर्व के दिन दो सौ रुपये कर दिया गया है। हालांकि इन आश्रमों की पूरी बुकिंग की जा चुकी है।
वीआईपी रास्तों को कराया गया खाली
भारी भीड़ को देखते हुए संगम नोज की ओर जाने वाली वीआईपी रास्तों को खोल दिया गया है। प्रशासन के निर्देश पर इन रास्तों पर बिछी चकर्ड प्लेटों को भी हटा दिया गया है। ताकि मौनी अमावस्या पर्व के दिन श्रद्धालुओं को स्नान करने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो।