शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की परमधर्मसंसद और विश्व हिंदू परिषद की धर्मसंसद के बाद शनिवार को कुंभ मेला क्षेत्र के मध्य प्रदेश मंडपम में जुटे संतों ने राम मंदिर पर ‘मन की बात’ की। दिगंबर अनी अखाड़े के महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा की अध्यक्षता में जुटे संतों ने दो टूक कहा कि राम मंदिर निर्माण पर देरी दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी तारीख जल्द घोषित हो।
जुटे संतों ने मुख्य रूप से तीन प्रस्ताव पारित किए। इसके तहत चौबीस दिनों में अध्यादेश लाकर राम मंदिर निर्माण की तिथि घोषित करना, मंदिर नहीं बना पाने के लिए अयोध्या से सार्वजनिक माफी मांगें मोदी और हिंदू धर्म के देवी-देवताओं पर जातिगत टिप्पणी को राष्ट्रदोह जैसा अपराध घोषित करने की मांग की गई।
संत स्वामी चक्रपाणि ने कहा, जिस बीजेपी को हिंदूवादी कहा जाता है, उसी के नेता हनुमान जी को जातिगत समीकरण में बांध रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण यह भी कि ग्यारह हजार पत्थरबाजों को छोड़ दिया जाता है। प्रधानमंत्री अब तक जाने कितनी बार मन की बात कह चुके हैं, लेकिन एक भी बार उन्होंने राम मंदिर मन की बात नहीं कही।
इसी तरह वह पूरी दुनिया घूम चुके लेकिन उन्होंने अयोध्या जाना उचित नहीं समझा। अब वक्त आ गया है कि राम मंदिर पर जल्द से जल्द कोई निर्णय हो। सेक्टर बारह के मुक्ति मार्ग स्थित कंप्यूटर बाबा के शिविर में हुए सम्मेलन में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी पंचानंद गिरि, अयोध्या के संत परमहंस दास, मौनी महाराज, महामंडलेश्वर नरसिंह दास, महामंडलेश्वर लक्ष्मण दास, देव मुरारी समेत हजारों संत मौजूद थे।