फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अध्यादेश लाकर घोषित हो राम मंदिर निर्माण की तिथि, संतों ने राम मंदिर पर की ‘मन की बात’

Sat, 02 Feb 2019 11:34 PM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
विज्ञापन
ram mandir - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की परमधर्मसंसद और विश्व हिंदू परिषद की धर्मसंसद के बाद शनिवार को कुंभ मेला क्षेत्र के मध्य प्रदेश मंडपम में जुटे संतों ने राम मंदिर पर ‘मन की बात’ की। दिगंबर अनी अखाड़े के महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा की अध्यक्षता में जुटे संतों ने दो टूक कहा कि राम मंदिर निर्माण पर देरी दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी तारीख जल्द घोषित हो।

विज्ञापन


जुटे संतों ने मुख्य रूप से तीन प्रस्ताव पारित किए। इसके तहत चौबीस दिनों में अध्यादेश लाकर राम मंदिर निर्माण की तिथि घोषित करना, मंदिर नहीं बना पाने के लिए अयोध्या से सार्वजनिक माफी मांगें मोदी और हिंदू धर्म के देवी-देवताओं पर जातिगत टिप्पणी को राष्ट्रदोह जैसा अपराध घोषित करने की मांग की गई।

संत स्वामी चक्रपाणि ने कहा, जिस बीजेपी को हिंदूवादी कहा जाता है, उसी के नेता हनुमान जी को जातिगत समीकरण में बांध रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण यह भी कि ग्यारह हजार पत्थरबाजों को छोड़ दिया जाता है। प्रधानमंत्री अब तक जाने कितनी बार मन की बात कह चुके हैं, लेकिन एक भी बार उन्होंने राम मंदिर मन की बात नहीं कही।
विज्ञापन


इसी तरह वह पूरी दुनिया घूम चुके लेकिन उन्होंने अयोध्या जाना उचित नहीं समझा। अब वक्त आ गया है कि राम मंदिर पर जल्द से जल्द कोई निर्णय हो। सेक्टर बारह के मुक्ति मार्ग स्थित कंप्यूटर बाबा के शिविर में हुए सम्मेलन में जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी पंचानंद गिरि, अयोध्या के संत परमहंस दास, मौनी महाराज, महामंडलेश्वर नरसिंह दास, महामंडलेश्वर लक्ष्मण दास, देव मुरारी समेत हजारों संत मौजूद थे।

विज्ञापन

राम मंदिर के लिए हवन नहीं, आंदोलन जरूरी

मुख्य अतिथि काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि जिस उम्मीद और भरोसे से हिंदू समाज ने भाजपा की सरकार बनाई थी, वह पूरी तरह टूट कर बिखर चुका है। श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण के नाम पर लोगों को मूर्ख बनाया जा रहा। सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया।

अपितु गोरक्षा में जुटे गोरक्षकों को स्वयं प्रधानमंत्री ने कई बार गुंडा कहकर संबोधित किया। यह विडंबना है कि राम मंदिर के लिए कोर्ट के पास समय नहीं जबकि यही कोर्ट एक आतंकवादी के लिए आधी रात को खुलती है। संत, सनातन धर्मावलंबी हवन तो कर ही रहे हैं, राम मंदिर के लिए हवन नहीं, आंदोलन जरूरी है।

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें