नागवासुकी मार्ग के पुल नंबर 14 के किनारे सेक्टर छह में अतुल पंडा के शिविर में कल्पवासियों के तंबुओं के बीच शौचालय का गड्डा बनाकर छोड़ दिया गया है। दुर्गंंध से कल्पवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। देवरिया जिले के हरवंश मिश्रा ने बताया कि सुबह-सुबह दुर्गंध के कारण उनके लिए तो पूजापाठ करने के साथ खाना बनाना भी मुश्किल हो गया है। इसी शिविर में कल्पवास कर रहे अस्सी वर्षीय बुजुर्ग बलिया जिले के शिवानंद उपाध्याय का कहना है कि पैसा जमा करने के बावजूद कर्मचारी शौचालय की सीट बैठाकर चले गए हैं, लेकिन उसेे अभी तक घेरा नहीं गया है। जिसके कारण शौचालय का इस्तेमाल किए जाने में असुविधा हो रही है।
गंगा स्नान बिना इस बार कल्पवास
कुंभ मेला प्रशासन ने 35 स्नान घाट बनाए हैं। वहीं क्षेत्र के सेक्टर नौ, दस और ग्यारह में स्नान घाट न बनाए जाने के कारण कल्पवासी गुस्से में हैं। तुलसी मार्ग स्थित कल्पवास करने आए गोरखपुर के फणींद्र नाथ उपाध्याय और राम विलास मिश्र का कहना है कि उन्हें मुख्य मेला क्षेत्र से सुदूर बसा दिया गया। यहां स्नान घाट नहीं होने के कारण उनका कल्पवास अधूरा है। इस बार तो कल्पवासी सबसे अधिक उपेक्षित हैं। सेक्टर सात स्थित गंगेश्वर मार्ग पर शिवम पंडा के शिविर में प्रतापगढ़ के रामबाबू तिवारी और लखनऊ के राम हरख सिंह का कहना है कि जब नियमित गंगा स्नान ही नहीं कर पा रहे हैं तो कल्पवास का मतलब ही क्या। घाट यहां से दो किलोमीटर दूर है अब इस उम्र में तो इतना पैदल चलना संभव नहीं हो पाएगा।
आधार कार्ड के बिना नहीं बना राशन कार्ड
हजारों कल्पवासियों राशनकार्ड अभी नहीं बनाए जा सके हैं। प्रशासन का दावा है कि २० जनवरी तक मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं के राशनकार्ड बनाए जा चुके हैं, लेकिन यह दावा कल्पवासियों के शिविरों में जाने से हवा हो जा रहा है। अधिकांश कल्पवासियों के राशनकार्ड सिर्फ इसलिए नहीं बनाए जा रहे हैं, क्योंंकि उनके पास आधार नहीं है। अन्य पहचान पत्रों को प्रस्तुत करने को टरकाया जा रहा है। जबकि आवंटन पर्ची के आधार पर भी राशनकार्ड बनाए जा सकते हैं। सेक्टर छह में पंडा श्याम लाल मिश्र ने बताया कि जिनका आधार कार्ड था उन कल्पवासियों का तो राशन कार्ड बनाया गया। पर, जिनके पास आधार कार्ड नहीं है, उनका राशन कार्ड बनाने से अफसरों ने साफ मना कर दिया। कमोबेश यही हाल सेक्टर नौ में ओंकारनाथ पंडा के शिविर में भी कल्पवासियों का है। यहां अभी तक एक भी कल्पवासी का राशनकार्ड नहीं बनाया गया है।
सरकार ने स्वच्छ कुंभ का संदेश देश भर में देने के लिए करीब सवा लाख शौचालय बनवाने का दावा किया। लाइन से लगाए गए शौचालय सुविधाजनक बताए गए लेकिन कहीं कहीं शौचालय दो फीट ऊंचा बनाने से बुजुर्ग कल्पवासियों को दिक्कत हो रही है। इसके अलावा जगह-जगह रखे कई टॉयलेट बॉक्स को घेरा नहीं गया, जिसके कारण उसका इस्तेमाल श्रद्धालु नहीं कर पा रहे हैं। कहीं नियमित सफाई न होने की शिकायत है तो कहीं पानी की ठीक व्यवस्था न होने से कल्पवासियों के साथ मेला क्षेत्र में आने वाले स्नानार्थियों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
कुंभ मेलाधिकारी विजय किरन आनंद ने कहा कि कुंभ मेला में अभी तक 6000 से अधिक संस्थाओं को सुविधाएं दी जा चुकी हैं। मेला प्रवेश के 46 घंटे के भीतर कल्पवासियों और संस्थाओं को सुविधाओं से संतृप्त किया जा रहा है। परेशानी होने पर सेक्टर कार्यालयों से संपर्क किया जा सकता है, तत्काल समस्या का निकारण होगा। राशनकार्ड के लिए आधार नहीं है तो कोई भी पहचान पत्र दिया जा सकता है।