ज्ञान का महत्व तभी है जब इसका जीवन में आत्मसात किया जाए। यदि हम ज्ञान प्राप्त कर प्रवचन सुनते या अध्ययन करते हैं, लेकिन इसका जीवन में इसका उपयोग नहीं करते हैं। इसका कोई फायदा नहीं होता है। यह विचार जीयर स्वामी ने श्रीदंडी स्वामी सेवा शिविर में भक्तों के समक्ष कही। उन्होंने कहा कि उपदेश सुनने तथा ज्ञान प्राप्त करने की सार्थकता तभी है जब उसे जीवन में उतारा जाए। हम रोज माता-पिता की सेवा का प्रवचन सुनते हैं, फिर भी इसे नहीं मानते हैं और नहीं आदर सम्मान देते हैं। तो प्रवचन सुनना निरर्थक हो जाता है।
उन्होंने कहा कि जीवन जीना अलग बात है लेकिन मर्यादित रूप से संयमित जीवन जीना अलग बात है। स्वाजी जी ने कहा कि सफाई रखना भी एक पूजा है। ईश्वर द्वारा जो मिला हुआ है उसमें व्यक्ति को संतोष करना चाहिए। ज्यादा विलासिता पूर्ण जीवन जीना उचित नहीं है। महाराज जी ने भक्तों से कहा कि जिस घर में भागवतगीता का पाठ होता है, उस घर में लक्ष्मी का वास होता है।
जिस घर में साधु संतों को सम्मान नहीं मिलता वह घर शमशान बन जाता है। जिस व्यक्ति के पास जुआ, शराब और वेश्वावृत्ति की प्रवृत्ति बढ़ जाती है उसका विनाश होने से कोई नहीं रोक सकता है। जीयर स्वामी ने भक्तों को यह भी बताया कि भगवान विषम परिस्थितियों में भक्त परीक्षा लेते हैं, ऐसे में उसे मर्यादित जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए।