कुंभ में पहुंचे हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने सोमवार को संगम में डुबकी लगाई। संत मोरारी बापू का आशीर्वाद लिया। मानस संगम कथा में हिस्सा लेने के बाद सीएम ने सेवा, समर्पण पर जोर दिया। कहा कि शरणागत होकर संतोष भाव से राष्ट्र की सेवा का संकल्प लें। समर्पण से समाज के सभी वर्गों को प्रोत्साहन मिलता है और सेवा की भावना पैदा होती है। इसके बाद उन्होंने जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद के अलावा कई संतों के शिविरों में धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। गुरु गोरखनाथ के अखाड़े में उन्होंने यज्ञ में आहुति डाली।
सीएम मनोहर लाल ने कहा कि आज से 40 वर्ष पहले 25 जनवरी 1979 को उन्होंने इसी संगम के किनारे स्नान कर समाजसेवा का संकल्प लिया था और उसका निर्वहन निरंतर कर रहा हूं। राष्ट्र सेवा में अपने जीवन को समर्पित करते हुए देश के प्रति खुद को शरणागत कर दिया है। इसके बाद जगदगुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज के शिविर में पहुंचकर सीएम ने व्यास पूजन किया। उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रयागराज में गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम होता है। इसमें से अदृश्य सरस्वती का उद्गम आदिबद्री हरियाणा में है।
फिर वह स्वामी अवधेशानंद महाराज के शिविर में पहुंचकर उनका आशीर्वाद लिया। यहां से निकलकर खट्टर ने पंचायती अखाड़ा निर्मल में पहुंचकर गुरु ग्रंथ साहिब के आगे शीश नवाया। उन्होंने बाबा फतेह सिंह व बाबा जोरावर सिंह शहीदी प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। यहां महंत ज्ञानदेव महाराज ने उनका स्वागत किया। यहां से निकलकर सीएम मनोहर लाल विश्व हिंदू परिषद के शिविर में पहुंचे। विहिप के पदाधिकारियों के साथ चाय पर चर्चा की और अपने पुराने साथियों के साथ मिलकर यादें भी ताजा कीं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल इसके बाद गोरखनाथ अखाड़ा पहुंचे।