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महाशिवरात्रि के पहले ही काला हुआ गंगाजल, संगम पर फैला कचरा, श्रद्धालुओं का चलना हुआ मुश्किल

Sun, 03 Mar 2019 06:47 PM IST
देव कश्यप नागेन्द्र पाल, अमर उजाला, प्रयागराज
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गंगा जल के स्वच्छ-निर्मल के प्रशासनिक अधिकारियों के दावे हवा-हवाई साबित होने लगे हैं। महाशिवरात्रि के पहले की संगम तीरे गंगाजल काला हो गया है। आस्था के चलते श्रद्धालुजन घाट पर पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं। यानि पर्व के दिन इन्हें ऐसे ही पानी में संगम स्नान करना पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर नियमित सफाई होने के बावजूद भी कूड़े कचरे का गुबार लगा हुआ। जिससे श्रद्धालुओं की आस्था को गहरा आघात पहुंंच रहा है।

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संगम नोज पर ऐसी अव्यवस्था फैली कि मेला प्रशासन की पूरी व्यवस्था बौनी हो गई। यातयात और इनकी प्रशासनिक सुविधाएं शो-पीस बन गए। शहरी से लेकर दूर-दराज के लोग घाटों पर भारी वाहनों के साथ पहुंचकर स्नान कर रहे हैं। ये स्नान ही नहीं बल्कि गंदगी फैलाने में पीछे नहीं रहे। आलम यह रहा कि घाट पर ही कपड़े बदलने का कार्यक्रम आरंभ हो गया। घाटों के जगह-जगह पर पूरी-सब्जियां के साथ ही कपड़े रखने के लिए उपयोग की जा रही पन्नियां बिखरी रही। इससे पेट नहीं भरा तो श्रद्धालुओं ने घाट पर कपड़े धोने लगे। इससे गंगा का पानी धीरे काला होने लगा।

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माघी पूर्णिमा तक घाट पर इतनी गंदगी फैली कि वहां पर बैठना दूभर हो गया और गंगाजल काला पड़ गया। चार मार्च को पड़ने वाले महाशिवरात्रि के होने में मात्र दो दिन ही शेष रहे गये हैं। लेकिन मेला के अफसरों ने पानी की निर्मलीकरण के लिए अभी तक कोई सार्थक कदम नहीं उठाया। जिससे श्रद्धालुजन पर्व के दौरान स्वच्छ गंगा में स्नान कर सकें। जबलपुर से आए अविनाश पांडेय ने सीधे पर इसके लिए प्रशासिनक अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया। कहा कि मोदी के गंगा सफाई अभियान में कोई कमी नहीं है। बशर्ते यहां के अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। फिर भी आस्था से आए श्रद्धालु संगम स्नान कर रहे हैं।
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