गंगा जल के स्वच्छ-निर्मल के प्रशासनिक अधिकारियों के दावे हवा-हवाई साबित होने लगे हैं। महाशिवरात्रि के पहले की संगम तीरे गंगाजल काला हो गया है। आस्था के चलते श्रद्धालुजन घाट पर पुण्य की डुबकी लगा रहे हैं। यानि पर्व के दिन इन्हें ऐसे ही पानी में संगम स्नान करना पड़ेगा। वहीं दूसरी ओर नियमित सफाई होने के बावजूद भी कूड़े कचरे का गुबार लगा हुआ। जिससे श्रद्धालुओं की आस्था को गहरा आघात पहुंंच रहा है।
संगम नोज पर ऐसी अव्यवस्था फैली कि मेला प्रशासन की पूरी व्यवस्था बौनी हो गई। यातयात और इनकी प्रशासनिक सुविधाएं शो-पीस बन गए। शहरी से लेकर दूर-दराज के लोग घाटों पर भारी वाहनों के साथ पहुंचकर स्नान कर रहे हैं। ये स्नान ही नहीं बल्कि गंदगी फैलाने में पीछे नहीं रहे। आलम यह रहा कि घाट पर ही कपड़े बदलने का कार्यक्रम आरंभ हो गया। घाटों के जगह-जगह पर पूरी-सब्जियां के साथ ही कपड़े रखने के लिए उपयोग की जा रही पन्नियां बिखरी रही। इससे पेट नहीं भरा तो श्रद्धालुओं ने घाट पर कपड़े धोने लगे। इससे गंगा का पानी धीरे काला होने लगा।