जानकारी के अनुसार लोक कलाओं को बचाने और कुंभ के दौरान उनका प्रचार-प्रसार करने के लिए सांस्कृतिक विभाग ने शहर के 20 प्रमुख स्थानों पर लघुमंच स्थापित किए हैं। चार-पांच प्रमुख स्थानों को छोड़ दिया जाए तो लगभग हर लघुमंच के कार्यक्रम में लगभग गिने चुने दर्शक ही मिल पा रहे हैं, जबकि पूरे तीन में हर मंच पर तीन बार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। केपीयूसी के बगल में लगे हुए मंच के स्टेज प्रभारी वेदांग त्रिपाठी ने बताया कि वो 16 कार्यक्रम संपन्न करा चुके हैं, लेकिन अक्सर कलाकार दर्शकों की कम संख्या से निराश होते हैं। कभी कभी ऐसा भी होता है कि कुछ दर्शकों में ही पूरा कार्यक्रम समाप्त हो जाता है। हंडिया के अजुग नारायण हंडिया के निवासी हैं, इनकी सरस्वती लोकसंगीत पार्टी है। अजुग ने बताया कि रोड के बगल मंच होने से दर्शक रुकते नहीं हैं बल्कि चलते हुए देख कर निकल जाते हैं।
इन स्थानों पर बने लघुमंच
रीवा-मिर्जापुर-प्रयाग, गऊघाट, कीडगंज, प्रदर्शनी स्थल, किला चौराहा, हाईकोर्ट, धूमनगंज रोड, दरभंगा चौराहा से कुंभ मेला, सिविल लाइंस पत्थर गिरिजाघर, बालसन चौराहा, जानसेनगंज चौराहा, खुसरोबाग, पुराना किला, लोकसेवा आयोग, सोहबतियाबाग, मानसरोवर सिनेमा चौराहा, यूनिवर्सिटी रोड चौराहा, अरैल, कानपुर रोड, ट्रैफिक चौराहा व बहुगुणा चौराहा।
मंच बनाने में नहीं दिखाई सूझबूझ
इन मंचों को देखकर ऐसा लगता है कि प्रशासन ने केवल मेले का फैलाव दिखाने के लिए इसे स्थापित किया है। मंचों का निर्धारण करते वक्त हड़बड़ी न करते हुए थोड़ा और सूझबूझ दिखाने की जरूरत थी। अधिकतर मंच रोड के बगल ही स्थापित हैं, चलते-चलते थोड़ी कोई कार्यक्रम देखता है। कलाकारों में निराशा स्वाभाविक है। - अतुल यदुवंशी,अध्यक्ष भारतीय लोककला महासंघ
शहर में 20 स्थानों पर लघुमंचों को स्थापित किया गया है, जिसका उद्देशय लुप्त हो रही सांस्कृतिक कलाओं को जन जन तक पहुंचा कर इसे जीवित रखना। हमने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों को इस मंच के माध्यम से अपने कला प्रदर्शित करने का मौका दिया है। दिन में तीन बार कार्यक्रम आयोजित होते है, ऐसे में किसी एक कार्यक्रम में हो सकता है कि दर्शक कम हो बाकी हर कार्यक्रम में लोग इन कार्यक्रमों का लुफ्त उठा रहे हैं। -अमित कुमार अग्निहोत्री, क्षेत्रीय अधिकारी सांस्कृतिक विभाग, कुंभ मेला प्रयागराज