कोरांव में भी फसल की कम पैदावार देख सदमे से एक किसान की जान निकल गई। किसान कोरांव के टुड़ियार गांव में खेती करता था और उससे होेने वाली कमाई से अपने बच्चों को पढ़ाता-लिखाता था। उसके बच्चे मध्य प्रदेश के रीवा जिले में रहते हैं। कोरांव में हुई इस घटना से गांव में मातम का माहौल है, लेकिन प्रशासनिक अफसरों की सेहत पर कोई फर्क नहीं। कोई अफसर किसान के घर झांकने भी नहीं पहुंचा।
कोरांव तहसील के टुड़ियार गांव के किसान कृष्णाकांत मिश्र (45 वर्ष) ने 15 बीघा खेत में गेहूं, अरहर, चना, मसूर की बोआई की थी। आठ बीघा में अरहर, तीन बीघा में चना-मसूर और बाकी के चार बीघा में गेहूं की फसल थी। किसान के एक पुत्र और एक पुत्री हैं, जो मध्य प्रदेश के रीवा जिले में रहकर पढ़ रहे हैं। किसान अपने बच्चों के पास गया हुआ था। फसल की कटाई-मड़ाई के लिए वह बृहस्पतिवार शाम गांव लौटा और शुक्रवार को खेत पर पहुंचा। हाथ में बालियां लेकर देखीं तो उसमें गेहूं नहीं था। अरहर, चना, मसूर की फसल भी पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी थी। किसान यह देखकर सन्न रह गया। ग्राम प्रधान बुद्धिसेन मिश्र ने बताया कि फसल की हालत देखने के बाद कृष्णाकांत तुरंत अपने बच्चों के पास रीवा लौट गया।
घर लौटने के बाद भी वह गुमसुम था और उसी रात सदमे में कृष्णाकांत की जान निकल गई। शनिवार को किसान का शव टुड़ियार गांव लाया गया, जहां परिवार वालों ने उसका अंतिम संस्कार किया। किसान की मौत के बाद उसकी पत्नी सियावती पूरी तरह से बेसुध हो गई है। ग्राम प्रधान ने बताया कि उसे पूरे घटनाक्रम की जानकारी एसडीएम को दे दी थी, जबकि कोरांव एसडीएम सुनील कुमार मिश्र का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। फिलहाल किसान के घर कोई अफसर झांकने भी नहीं पहुंचा।