shahi snan
अगर पुत्र अपने दिवंगत पिता के नाम का स्मरण कर त्रिवेणी संगम पर डुबकी लगाता है, तो शास्त्रों के अनुसार उसके पूर्वजों को उसका पुण्य फल मुक्ति के रूप में प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार स्नान करने वाले अगर अपने बन्धु-बान्धवों, माता-पिता जो किसी कारणवश तीर्थराज प्रयाग में नहीं आ पाएं हैं, उनका नाम स्मरण कर डुबकी लगाते हैं तो वह भी पुण्य के भागी बनते हैं। जहां मकर संक्रान्ति पूजा-पाठ, दान, व्रत आदि हेतु सर्वोत्तम पुण्यकाल है, वहीं सूर्य नारायण की पूजा संक्रान्ति पर्व पर सूर्य संक्रमण काल में विशेष दानादि करना चाहिए।