हिंदुस्तानी एकेडमी में वाणी प्रकाशन और भारतीय ज्ञानपीठ की तरफ से रविवार को आयोजित संगोष्ठी में डॉ. कीर्ति कुमार की पांच कहानी संग्रह पर चर्चा की गई। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो. प्रभाकर सिंह ने कहा कि कीर्ति कुमार की कहानियां साधारण से असाधारण की खोज हैं।
उन्होंने कहा कि इनकी कहानियों में कहीं-कहीं आदर्शवाद भी हावी होता दिखता है। उनकी लघु कथाओं का ढांचा अपेक्षाकृत ज्यादा मजबूत है। उनका उपन्यास काशीनाथ सिंह की काशी का अस्सी की याद दिलाता है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मीडिया स्टडीज विभाग के समन्वयक डॉ. धनंजय चोपड़ा ने कहा कि टेक्नोलॉजी महत्वपूर्ण है, लेकिन पढ़ा वहीं जा रहा है, जिसमें व्यक्ति खुद को खोज पा रहा है। साहित्य को जितना सहज बनाकर प्रस्तुत किया जाता है, उसकी पहुंच अधिक से अधिक लोगों तक होती है। इस मौके पर डॉ. संजय कुमार सिंह, अशोक मेहता, डॉ. हर्षमणि सिंह, विनोद तिवारी आदि उपस्थित रहे।