जूना अखाड़े के साथ अनुबंध है अवैधानिक
ऋषि अजय दास ने कहा कि किन्नर अखाड़े का अवैधानिक अनुबंध जूना अखाड़े के साथ करके किन्नर अखाड़े के सभी प्रतीक चिह्नों को क्षत-विक्षत किया गया है। ये लोग न तो जूना अखाड़े के सिद्धांतों के अनुसार चल रहे हैं और न ही किन्नर अखाड़े के। किन्नर अखाड़े के गठन के साथ ही वैजयंती माला गले में धारण कराई गई थी, जो कि शृंगार का प्रतीक है, लेकिन किन्नर अखाड़े में उसे त्याग करके रुद्राक्ष की माला धारण कर ली।
यह संन्यास का प्रतीक है और संन्यास बिना मुंडन संस्कार के मान्य नहीं होता है। अजय दास ने कहा कि 2015-16 उज्जैन कुंभ में लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को आचार्य महामंडलेश्वर नियुक्त किया गया था। उन्होंने ममता कुलकर्णी को बिना किसी धार्मिक व अखाड़े की परंपरा को मानते हुए वैराग्य के बजाय सीधे महामंडलेश्वर की उपाधि देकर पट्टाभिषेक कर दिया।