त्रिवेणी महोत्सव के उद्घाटन कार्यक्रम में किदवई इंटर कॉलेज की छात्राओं को ढेड़िया नृत्य की सामूहिक प्रस्तुति के लिए बुलाया गया था, लेकिन छात्राओं को बिना प्रदर्शन के ही लौटा दिया गया। उनका कार्यक्रम मुख्य अतिथि के बोलने के बाद था, लेकिन जब उनका नाम मंच से नहीं पुकारा गया तो वह वापस नौ बजे लौट गईं। नृत्य की प्रस्तुति के लिए छात्रा दिव्या सक्सेना, ऋतु, आरिया, अंजलि मौर्या, स्वालेहा, कामिनी यादव के साथ संगीत की शिक्षिका पद्मा श्रीवास्तव, कामिनी श्रीवास्तव आईं हुईं थीं।
शिक्षिका पद्मा ने कहा कि प्रशासन की ओर से इस बात के लिए कहा गया था। उन्होंने हफ्तों तैयारी भी की, लेकिन यहां पर कार्यक्रम न होने से मायूसी हुई।शहरियों को समर्पित त्रिवेणी महोत्सव अफसरों, उनके करीबियों और सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों के मनोरंजन तक ही सीमित रह गया। करोड़ों रुपये खर्च कर बड़े कलाकारों को बुलाकर अपनी पीठ थपथपाने वाले अफसरों ने पीछे मुड़कर यह देखने की जहमत भी नहीं उठाई कि महोत्सव देखने पहुंचने आम लोग बाहर से ही धक्के खाकर लौट जा रहे हैं। वीआईपी दीर्घा के साथ हर उस दीर्घा पर सिर्फ उन्हीं को बैठने की जगह मिली, जिन्हें प्रशासन की ओर से पास जारी किए गए थे।
हालांकि यमुना बैंक रोड पर बोट क्लब के बगल में मंगलवार को आयोजित त्रिवेणी महोत्सव में आम लोगों के बैठने के लिए भी सबसे पीछे एक दीर्घा बनाई गई थी लेकिन उससे कई गुना ज्यादा भीड़ बैरिकेडिंग के बाहर धक्के खा रही थी। भीड़ में शामिल तमाम परिवार पार्श्व गायिका श्रेया घोषाल की एक झलक पाने के लिए बेताब थे। अफसर आगे की दीर्घा में लगे लग्जरी कुर्सियों पर बैठकर कार्यक्रम देखने में व्यस्त थे, सो पीछे धक्के खा रही भीड़ को नियंत्रित करने की किसी के पास फुरसत नहीं थी।
अल्लापुर से अपनी पत्नी और दस साल की बेटी के साथ त्रिवेणी महोत्सव में श्रेया घोषाल का कार्यक्रम देखने पहुंचे अरविंद वर्मा को जब काफी मशक्कत के बाद भी कहीं बैठने या खडे़ होने की जगह नहीं मिली तो वह परिवार संग बिना कार्यक्रम देखे लौट गए। अरविंद का कहना था कि कार्यक्रम तो सिर्फ अफसरों और प्रभावशाली लोगों के लिए कराया गया। आम आदमी को यहां भी ठीक वैसे ही धक्के खाने पड़े, जैसे सरकारी दफ्तरों में अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए खाने पड़ते हैं। अरविंद की तरह वहां तमाम ऐसे लोग थे, जो इस अव्यवस्था से काफी नाराज थे। उनका आरोप था कि यह कार्यक्रम तो सिर्फ प्रशासनिक अफसरों और उनके करीबियों के मनोरंजन के लिए था।