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Khusro Bagh : निसार बेगम का मकबरा...शहजादी की अधूरी ख्वाहिश की निशानी

Wed, 30 Apr 2025 06:36 PM IST
विनोद सिंह शशांक वर्मा, प्रयागराज

सार

निसार बेगम ने खुद कराया था निर्माण, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षितप्रयागराज। सनोवर के वृक्षों और तारों की चित्रकारी से सजा खुसरो बाग का सबसे खूबसूरत मकबरा रूह विहीन है। मुगल बादशाह जहांगीर की बड़ी बेटी निसार बेगम ने अपनी जीते जी इसका निर्माण कराया था।
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खुसरो बाग, प्रयागराज। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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सनोवर के वृक्षों और तारों की चित्रकारी से सजा खुसरो बाग का सबसे खूबसूरत मकबरा रूह विहीन है। मुगल बादशाह जहांगीर की बड़ी बेटी निसार बेगम ने अपने जीते जी इसका निर्माण कराया था। लेकिन उसे यहां दफनाया न जा सका। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित शायद ही ऐसा कोई मकबरा हो।

जहांगीर के बड़े बेटे मिर्जा खुसरो के नाम पर निर्मित उद्यान खुसरो बाग में मुगल परिवार के सत्ता संघर्ष की कहानी भी दर्ज है। यहां चार मकबरे हैं। पहली कब्र मिर्जा खुसरो की मां शाह बेगम की है, जिसने बाप-बेटे के झगड़े के चलते खुदकुशी कर ली थी। दूसरी खुसरो, तीसरी खुसरो की बहन निसार बेगम और चौथी बीबी तमोलन की है।

मिर्जा खुसरो की मौत 1622 में हुई तो उसे यहीं दफनाया गया था। उसके मकबरे का निर्माण निसार बेगम ने करवाया था। मां शाह बेगम और खुसरो के मकबरे के बीच 1624-25 में निसार ने अपना मकबरा बनवाया था। लेकिन यहां अब चमगादड़ों का ठिकाना है। निसार किसी गुमनाम कब्र में सोई है। ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि आगरा के सिकंदरा स्थित अकबर टॉम्ब में निसार दफनाई गई, लेकिन इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा सर्किल में सीनियर कंजर्वेटर रहे डॉ. आरके दीक्षित बताते हैं कि अकबर के मकबरे के बगल में जहांगीर की पुत्रियों की कब्र तो है लेकिन नाम का उल्लेख नहीं है। हालांकि, खुसरो बाग में बीबी तमोलन का मकबरा भी कब्र विहीन है, जिसका कोई रिकार्ड नहीं है। इसके अलावा भी कई कब्रें अब सूनी हैं।

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आगरा के चौबुर्जी से काबुल गया था बाबर का शव

आगरा में यमुना किनारे एत्मादुद्दौला के मकबरे के पास ही चौबुर्जी स्मारक है, जहां 1530 में बाबर की मौत के बाद उसे दफनाया गया था। लेकिन बाबर की इच्छा थी कि उसे काबुल में दफनाया जाए। छह महीने बाद उसके शव को काबुल में दफना दिया गया।

बुरहानपुर में सूनी है मुमताज की कब्रगाह

दुनिया में अद्भुत वास्तुकारी की मिसाल ताजमहल में दफ्न मुमताज महल पहले मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के जैनाबाद में दफनाई गई थी। बाद में उसके शव को आगरा लाया गया। उस वक्त ताजमहल तैयार हो रहा था। आरके दीक्षित बताते हैं कि उसके शव को कुछ महीनों के लिए ताज के बगल मस्जिद के पास पीले पत्थरों की चहारदीवारी बनाकर रखा गया था। फिर ताज की मुख्य इमारत में लाया गया। इसके बाद ताज के ऊपरी हिस्से का निर्माण हुआ।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में बहुत सी गुमनाम कब्रें हैं। सिकंदरा के अकबर टॉम्ब और दिल्ली स्थित हुमायूं टॉम्ब में कई बेनाम कब्रें हैं। फैक्ट के बिना इनके बारे में कोई कयास नहीं लगाया जा सकता। - पद्मश्री केके मोहम्मद, पूर्व रीजनल डायरेक्टर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण

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