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सिल्ट सफाई के नाम पर खानापूर्ति

Thu, 07 Dec 2017 10:20 PM IST
कौशाम्बी ब्यूरो
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जिले के आधे हिस्से में फैले किशनपुर पंप कैनाल व उसकी माइनरों, रजबहों की सिल्ट सफाई के लिए सरकार के पास रुपए नहीं हैं। सिल्ट सफाई के लिए शासन ने 33 लाख रुपए की मंजूरी दी है। इस धनराशि से 103 किलोमीटर नहर व उसकी माइनरों की सफाई कराई जा रही है। ऐसे में सिल्ट साफ न होने वाली माइनरों, रजबहों में टेल तक पानी पहुंचाना टेढ़ी खीर होगी।
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किशनपुर पंप कैनाल की 28 माइनरों व छह रजबहों का जाल जिले में 264 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। नहर व माइनरों में लगातार पानी चलने से सिल्ट जमा हो जाती है। रबी व खरीफ की खेती शुरू होने से पहले इन माइनरों की सिल्ट सफाई का नियम है। इस साल सिल्ट सफाई के लिए किशनपुर पंप कैनाल को 30 अक्तूबर को बंद कर दिया गया। सिल्ट सफाई के लिए पचास लाख से अधिक का इस्टीमेट शासन को भेजा गया। शासन ने इस साल महज 103 किलोमीटर नहर व उसकी माइनरों की सफाई के लिए 33 लाख के इस्टीमेट को मंजूरी दी। इस्टीमेट मंजूर होने के बाद 15 नवंबर तक सिल्ट सफाई का काम टेंडर प्रक्रिया के चलते शुरू नहीं हो सका।

16 नवंबर से नहरों की सफाई ठेकेदार ने शुरू कराया। कम धनराशि होने के कारण किशनपुर पंप कैनाल व उसकी कुछ खास माइनरों की ही सिल्ट सफाई कराई जा रही है। बाकी माइनरों व रजबहों की सफाई न होने से इनके किसानों को टेल तक पानी मिल पाने में कठिनाई होगी। बगैर सिल्ट सफाई के टेल तक पानी पहुंचाने की कोशिश विभागीय जिम्मेदारों ने की तो मुहाने के खेत पटरी ओवरफ्लो होकर जलमग्न हो जाएंगे। इससे टेल के किसानों को जहां फायदा होगा वहीं मुहाने के किसानों की फसलें पानी से नष्ट होना तय है। उधर, सभी माइनरों व रजबहों की सफाई न कराए जाने से इलाकाई किसानों में नाराजगी है।
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