कड़े इम्तिहान के बाद मिली हरी झंडी
सिस्टम को लागू करने से पहले रेलवे ने परीक्षण किया। डब्ल्यूएपी-7 लोकोमोटिव के साथ आठ से 22 कोच वाली एलएचबी ट्रेनों और 20 कोच वाली वंदे भारत रेक पर इसका ट्रायल हुआ। विशेष रूप से चौरी चौरा एक्सप्रेस के साथ 20,000 किलोमीटर से अधिक का यात्री ट्रायल पूरा किया गया। जो पूरी तरह संतोषजनक रहा।
अब गाजियाबाद-टुंडला सेक्शन को कवच से जोड़ने की तैयारी
- रेलवे के मिशन रफ्तार के तहत अब अगले चरण में गाजियाबाद-टुंडला सेक्शन को कवच से जोड़ने की तैयारी है। प्रधान मुख्य संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर सतेंद्र कुमार के नेतृत्व वाली टीम अब इस मिशन को आगे बढ़ाएगी ताकि पूरे रूट पर ट्रेनों को 160 किमी/घंटा की निर्बाध गति दी जा सके।
कवच की खासियत :
ऑटोमैटिक ब्रेक : अगर लोको पायलट सिग्नल ओवरशूट (लाल सिग्नल पार) करता है तो सिस्टम खुद ब्रेक लगा देगा।
स्पीड कंट्रोल : निर्धारित गति से तेज चलने पर ट्रेन की रफ्तार अपने आप कम हो जाएगी।
कोहरे में मददगार : खराब मौसम या धुंध में भी यह सिस्टम लोको पायलट को सिग्नल की सटीक जानकारी देगा।