कोरोना महामारी के दौर में बेरोजगारी से जूझ रहे एक युवक की मानसिक स्थिति बिगड़ गई और उसने घर में बने देवस्थान को तोड़कर कमरे के अंदर ही फांसी लगा ली। परिजनों ने जब कमरे में उसका शव लटकते हुए देखा तो कोहराम मच गया।
पिपरी कोतवाली के गेरिया खालसा गांव निवासी रंगीलाल (40) मेहनत मजदूरी कर परिवार का गुजारा करता था। परिवार वालों के मुताबिक वह झाड़फूंक भी करता था। पिछले दिनों नवरात्र में उसने घर में दुर्गा प्रतिमा स्थापित की और पूजा-पाठ करने लगा। परिवार के लोगों का कहना है कि कोरोना महामारी में काम धंधा नहीं मिलने की वजह से वह टूट चुका था। आर्थिक संकट से उबरने के लिए उसने इस नवरात्र मन्नत मांगी थी, लेकिन इसके बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। पत्नी राजपति के अनुसार मंगलवार की रात अचानक रंगीलाल उल्टी सीधी हरकतें करने लगा।
घर के कमरे में बने देवस्थान को उसने तोड़ना शुरू कर दिया तो पत्नी और बच्चों ने विरोध किया। इसे लेकर रंगीलाल का पत्नी राजपति से विवाद भी हुआ। मोहल्ले वालों का कहना है कि बात बढ़ने पर रंगीलाल ने पत्नी और बच्चों को घर से बाहर निकाल कर खुद को कमरे में बंद कर लिया और रात भर कमरे में चीखता-चिल्लाता रहा। उधर पत्नी राजपति अपने बच्चों को लेकर छत पर सोने चली गई। उसी दौरान रंगीलाल ने कमरे में फांसी लगा ली। सुबह होने पर जब परिवार ने रंगीलाल के शव को फंदे से झूलता देखा तो कोहराम मच गया। जानकारी पर पहुंची पुलिस ने मौका मुआयना करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया।