Kaushambi's district panchayat president becomes Aadadhari
- फोटो : KAUSHAMBI
अवधरानी बनीं कौशाम्बी की जिला पंचायत अध्यक्ष
उपचुनाव में मधुपति को एक वोट से हराया
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। कौशाम्बी में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सोमवार को उपचुनाव हुआ। चुनाव में भाजपा समर्थित अवधरानी पटेल ने निर्दलीय प्रत्याशी मधुपति वाचस्पति को एक वोट से हराकर जीत हासिल की। 26 सदस्यीय सदन के तीन सदस्यों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं किया। मतगणना के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी( जिलाधिकारी) मनीष कुमार वर्मा ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष को प्रमाण पत्र दिया।
सुबह 11 बजे से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कलक्ट्रेट में जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए मतदान कराया गया। इसमें 26 के सापेक्ष 23 सदस्यों ने वोट डाले। तीन बजे के बाद मतों की गिनती कराई गई। इसमें अवधरानी पटेल को एक वोट से चुनाव जीत गईं। चुनाव में अवधरानी को 12 तो मधुपति को 11 वोट मिले। नतीजे की घोषणा होते ही चायल क्षेत्र के भाजपा विधायक संजय कुमार गुप्ता, सिराथू के शीतला प्रसाद उर्फ पप्पू पटेल एवं मंझनपुर के विधायक लालबहादुर समेत बड़ी संख्या में भाजपाई कलक्ट्रेट पहुंचे। समर्थकों ने नव निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष अवधरानी व तीनों विधायकों को फूल-मालाओं लाद दिया।
गौरतलब है कि आठ अक्तूबर 2018 को अनामिका सिंह के इस्तीफा देने के बाद से खाली चल रही जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर शासन ने डीएम को बतौर प्रशासक नियुक्त कर रखा था। दस महीने से रिक्त चल रहे पद पर राज्य निर्वाचन आयोग ने 29 जुलाई को उपचुनाव कराने की घोषणा की थी। उपचुनाव में खुले तौर पर किसी भी राजनीतिक दल के नहीं कूदने की वजह से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधुपति और वार्ड नंबर 22 की सदस्य अवधरानी पटेल ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी नामांकन किया था। बाद में सत्ताधारी दल भाजपा के सांसद व तीनों विधायक अवधरानी के समर्थन में आ गए। इसी बीच अवधरानी पटेल के बेटे जगजीत ने विपक्षी उम्मीदवार मधुपति पर सदस्यों की खरीद-फरोख्त करने का आरोप लगाते हुए शिकायत डीएम व राज्य निर्वाचन आयोग से की। साक्ष्य के तौर पर वीडियो भी प्रस्तुत किया। जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी ने पूरे मामले की रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दी। इसी के आधार पर आयोग ने 29 जुलाई को होने वाला उपचुनाव मतदान से चंद घंटे पहले स्थगित कर दिया। चार दिन की माथापच्ची के बाद आयोग ने पुन: पांच जुलाई को मतदान कराने का फैसला लिया।