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गंगा में गिर रहे नाले, और गंदा हुआ जल

Sun, 27 Dec 2015 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कौशाम्बी
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गंगा प्रदूषण की स्थिति लगाकर बिगड़ रही है। रविवार को गंगा जल में कालापन और बढ़ गया। इस मुद्दे पर साधु-संत आंदोलन का एलान भी कर चुके हैं। गंगा प्रदूषण को लेकर लगातार हो रहे हल्ले से अफसर भी परेशान हैं। रविवार को डीएम ने माघ मेला क्षेत्र में अफसरों के साथ बैठक की और बिना टैप 23 नालों की स्थिति के बारे में पूछा। जवाब चौंकाने वाला था। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसरों ने बताया कि नालों के गंदे पानी के शोधन का काम अब तक शुरू नहीं हो सका है। डीएम ने दस दिनों के भीतर यह काम पूरा करने के निर्देश दिए।
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हालांकि पहले भी डीएम ने बिना टैप नालों का पानी गंगा में गिरने से रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे लेकिन कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। शहर में 23 नाले ऐसे हैं जो टैप नहीं किए गए हैं और उनका गंदा पानी सीधे गंगा-यमुना में गिरता है। शहर में कई जगह सीवर लाइनें इन नालों से जुड़ी हुई हैं, सो गंगा में गिरने वाली गंदगी की मात्रा काफी अधिक है। ऐसे में जल स्तर थोड़ा भी कम हुआ तो प्रदूषण तेजी से बढ़ने लगता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। इस मसले पर डीएम संजय कुमार ने रविवार को मेला प्रशासन के कार्यालय में अफसरों के साथ बैठक की। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसरों ने डीएम को बताया कि बिना टैप नालों के पानी को बोया रिमिडियल विधि से शोधित किए जाने के बाद गंगा में छोड़े जाने की योजना है। इस पर अभी काम नहीं शुरू हो सका है। 26 दिसंबर को ही इसके लिए टेंडर हुआ है। दो-तीन दिनों में काम शुरू करा दिया जाएगा।

मेले के दौरान नालों का पानी शोधित किए जाने के बाद ही गंगा में छोड़ा जाएगा। इस पर डीएम ने नाराजगी जाहिर की और दस दिनों के भीतर यह काम पूरा करने के निर्देश दिए। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों ने डीएम के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसके मुताबिक सबकुछ ठीक है और गंगाजल में प्रदूषण नहीं है। सिर्फ जलस्तर घटने से गंगाजल मटमैला दिख रहा है। उधर, पूर्व पार्षद एवं समाजसेवी कमलेश सिंह और उनके साथियों ने गंगा जल का नमूना गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के महाप्रबंधक को सौंपते हुए उसकी जांच कराने और नालों की टैपिंग का काम शीघ्र पूरा कराने की मांग की। कमलेश सिंह का कहना है कि नागवासुकि से मोरी गेट तक गंगा जल काफी प्रदूषित है और उसका रंग लाल होता जा रहा है। अफसरों को इसे गंभीरता से लेना चाहिए और कागज में सबकुछ दुरुस्त करने के बजाय मौके पर हालात सुधारने की कोशिश करनी चाहिए।
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गंगा जल में अचानक बढ़े प्रदूषण के मसले पर सांसद केशव मौर्य ने रविवार को मेला प्रशासन के कार्यालय में डीएम से मुलाकात की और जांच कराने के कहा कि किस वजह से गंगा जल का रंग लाल हो रहा है। सांसद ने पांटून पुल का का धीमा होने पर चकर्ड प्लेट न बिछाए जाने पर असंतोष जाहिर किया। डीएम से मेले की स्वच्छता पर विशेष ध्यान रखने को कहा। साथ ही इस मद में बजट के लिए प्रस्ताव देने को भी कहा। सांसद ने मेला क्षेत्र का निरीक्षण भी किया।
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