मजदूरी कर पिता ने की बेटी की परवरिस
चार भाई बहनों में सबसे छोटी सुनीता के पिता चुन्नीलाल खेतों पर मजदूरी करते हैं। मां गुरुदेई भी उनकी मदद करती हैं। चुन्नीलाल ने 2017 में सुनीता को इस उम्मीद से लखनऊ हॉस्टल में भर्ती कराया था कि, उसका खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। वह हॉस्टल में रहकर पढ़-लिख कुछ बन जाएंगी। सुनीता ने हॉस्टल में रहकर बीके वाजपेई की देखरेख में ट्रेनिंग शुरू की।
पहले ही साल में बन गई थीं राष्ट्रीय चैंपियन: क्रीड़ा अधिकारी
जिला क्रीड़ा अधिकारी रुस्तम खॉन ने बताया कि सुनीता देवी बेहद प्रतिभाशाली एथलीट हैं। 2017 में ही वह जूनियर की राष्ट्रीय चैंपियन बन गईं। लम्बी दूरी की एथलीट सुनीता ने 1500 मीटर, 3000 मीटर की दौड़ के अलावा कई क्रासकंट्री दौड़ में स्वर्ण पदक झटकने में कामयाब हो चुकी हैं। उनके कोच बीके बाजपेई ने बताया कि सुनीता में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने की क्षमता है। वह एशियाई चैंपियनशिप में भी पदक जीतकर लौटेंगी।