आरओ-एआरओ-2017 की मुख्य परीक्षा में कश्मीर समस्या और पड़ोसी देशों से मिलने वाली चुनौतियों जैसे समसामयिक ज्वलंत मुद्दों से जुड़े सवाल पूछे गए। मुख्य परीक्षा में सोमवार को निबंध का पेपर था। इसमें अभ्यर्थियों की उपस्थिति 81.38 फीसदी रही। परीक्षा केवल पहली पाली में थी, जिसके लिए 12974 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से 10558 अभ्यर्थी उपस्थित और 2416 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।
तीन घंटे के पेपर में तीन खंडों से एक-एक विषय का चयन करते हुए कुल निबंध लिखने थे। प्रत्येक निबंध 600 शब्दों में लिखना था। खंड एक में पूछा गया, ‘राष्ट्रीय एकता की दृष्टि से कश्मीर समस्या पर विचार करें।’ इसी खंड में एक सवाल यह भी था, ‘भारत की मौलिक एकता क्या है? उदाहरण सहित विचार कीजिए।’ इसके अलावा खंड तीन में एक सवाल पूछा गया, ‘भारतीय एकता को ध्यान में रखते हुए पड़ोसी देशों से मिलने वाली चुनौतियां एवं समाधान विषय पर विचार कीजिए।’
हालांकि इस बार अभ्यर्थियों को निबंध का पेपर कठिन लगा। अभ्यर्थियों के मुताबिक पूर्व में जो भी परीक्षाएं हुईं, उनमें कारण एवं प्रभाव लिखने के लिए आता था लेकिन इस बार नीतियों से जुड़े सवाल आए जिनपर निबंध लिखना आसान नहीं था। मसलन, एक सवाल के तहत प्राकृतिक आपदा नीतियों के प्रारूपों पर विचार करना था। एक अन्य सवाल था, ‘भारतीय किसान नीति की समकालीन चुनौतियां पर प्रकाश डालें।’ अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने जिस हिसाब से तैयारी की थी, पेपर उसे अलग हटकर था।