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Prayagraj News: अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले सेनानी कमलाकांत तिवारी दुनिया से अलविदा

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आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले स्वतंत्रता सेनानी कमलाकांत तिवारी ने सोमवार को अंतिम सांस ले ली। वह 106 वर्ष थे। उनके निधन की सूचना पर शोक की लहर दौड़ गई। जानकारी मिलने पर एसीपी मेजा रवि कुमार गुप्ता, इंस्पेक्टर मांडा सहित कई अ्रफसर उनके घर पहुंचे।मंगलवार की सुबह नरवर चौकठा गंगा घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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इलाके के बरहाकला गांव निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कमलाकांत तिवारी का जन्म तीन मई 1919 को हुआ था। महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलन से प्रभावित होकर 1932 में वह अंग्रेजों के खिलाफ जंग में शामिल हो गए थे। ऊंचडीह रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को आग के हवाले करने के मामले में अंग्रेजी सेना को उनकी तलाश थी। इस दौरान अंग्रेजों को चकमा देने में वह सफल रहे और उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका। दूसरी बार बभनी गांव के सामने दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग की पटरियों को उखाड़ने के मामले में उन्हें उरुवा से गिरफ्तार कर लिया गया और अंग्रेजी हुकूमत ने उन्हें जेल भेज दिया।
करीब सात माह जेल में रहने के बाद उन्हें रिहा किया गया। इसके बाद उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष तेज करने की रणनीति बनाई। आजादी मिलने के बाद पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने 1971 में उन्हें तांबे की शील्ड प्रदान की। इसके बाद प्रदेश के पूर्व सीएम रहे हेमवंती नंदन बहुगुणा जोशी ने चांदी का बैज लगाकर उन्हें सम्मानित किया। उन्हें कई बार सम्मानित किया गया था। सोमवार शाम सेनानी ने अंतिम सांस ली। उनके दो शिक्षक पुत्र राजेंद्र प्रसाद और राजधर तिवारी सेवा निवृत्त हो चुके हैं।
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