उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर फटने की घटना की सूचना मिलने पर माघ मेला में कल्पवास कर रहे श्रद्धालुओं के शिविरों में घंटों मोबाइल फोन घनघनाते रहे। श्रद्धालुओं के परिजन लगातार उनका हालचाल पूछते रहे। इधर आपदा का असर संगम तक पहुंचने की आशंका से शिविरों में ठहरे कल्पवासियों में भी बेचैनी दिखी। लगभग 50 हजार कल्पवासियों, साधु-संतों को इस बात की चिंता सता रही है कि यदि गंगा में जलस्तर बढ़ा तो क्या होगा। शिविर हटेंगे तो कहां जाएंगे।
माघ मेला क्षेत्र में रविवार को दोपहर बाद से कल्पवासी हों या साधु-संत, सभी उत्तराखंड की आपदा से परेशान दिखे। गोरखपुर सहजनवा के भूषण उपाध्याय प्रयागवाल सभा के महामंत्री के शिविर में रहकर कल्पवास कर रहे हैं। उन्हें कुछ पता होता, इससे पहले उनके बेटे का फोन आ गया। हालचाल लिया और पापा को सुरक्षित घर ले जाने को कहा। वहीं संत कबीर नगर के राम मिलन यादव ने परिजनों को बताया कि हालात फिलहाल ठीक हैं, चिंता की जरूरत नहीं है। उधर जिगना मिजापुर के विनोद पाठक, संतकबीर नगर की हीरा देवी के परिजन भी परेशान रहे। बार-बार फोन कर पुरोहितों से मेला क्षेत्र के साथ गंगा में जल बढ़ने की दशा में क्या करेंगे, इस पर चर्चा कर संतुष्ट हुए। मेजा के हरिश्चंद्र, कौड़िहार के सजनलाल ने बताया कि 20 बरस हो गए, कुछ न हुआ, इस बार भी गंगा मैया सब ठीक ही करेंगी।
कब आएगा पानी, क्या करेंगे लोग
शिविरों में रहने वाले कल्पवासियों का कहना था कि वे सजग हैं । कुछ हुआ तो सुरक्षित स्थान पर चले जाएंगे। लोग आपस में पूछताछ करते रहे कि कब आएगा पानी, मौनी का स्नान कर पाएंगे कि नहीं, कल्पवास कैसे पूरा होगा। तमाम चिंताओं के बीच लोग अब भगवान का सहारा बता रहे हैं। साधु-संतों ने कहा कि जल कितना बढ़ेगा इस पर सारी चीजें निर्भर हैं।
तीर्थपुरोहितों के 150, साधु-संतों के हैं करीब सौ शिविर
माघ मेला इस बार 70 फीसदी झूंसी की ओर है। यहां गंगा किनारे दंडी बाड़ा, खाक चौक के साथ तीर्थ पुरोहितों के करीब 150 और साधु-संतों के करीब सौ शिविर हैं। इनमें रह रहे लोग कभी कटान तो कभी बारिश जैसी आपदा का सामना कर चुके हैं। लोगों का कहना है कि एक मीटर तक पानी बढ़ा तो स्थिति नियंत्रण में रहेगी, लेकिन इससे ज्यादा हुआ तो मुसीबत बढ़ेगी।
हटाए जा चुके हैं एक शिविर के पांच तंबू, अब महावीर पुलिस चौकी पर भी खतरा
मेला बसावट के तुरंत बाद गंगा में कटान की वजह से मुनीश आश्रम शिविर के पांच तंबू हटाए जा चुके हैं। मठ, मछली, बंदर शिविर को किसी तरह बचाया गया। अब आपदा की स्थिति में गंगा में अचानक जल बढ़ा तो कई शिविर चपेट में आ सकते हैं। मेला क्षेत्र में साफ दिख रहा है कि महावीर पुलिस चौकी समेत कई प्रशासनिक शिविर में संभावित बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। सर्वाधिक खतरा पुलिस चौकी पर है।
शिविर स्थापना के टूट चुके हैं मानक
माघ मेला क्षेत्र में इस बार शिविर बसाने के मानक पहले चरण में ही टूट चुके हैं। गंगा घाट से 270 मीटर दूर शिविर स्थापना के निर्देश हैं। पिछले महीने गंगा में जल वृद्धि के बाद कटान से एक नहीं कई शिविरों की जमीन गंगा में समा गई। कटान से करीब 220 मीटर तक जमीन दरक गई। इस बार कई शिविरों की स्थापना गंगा से बिल्कुल करीब की गई है। जलस्तर बढ़ा तो इन शिविरों के लिए खतरा उत्पन्न हो जाएगा।
जरूरत पड़ी तो हटाए जाएंगे कल्पवासी
सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासनिक महकमा हाई अलर्ट मोड पर है। अफसरों ने शिविर संचालकों से ही नहीं गंगा किनारे के कुछ कल्पवासियों से भी संपर्क कर सतर्क रहने को कहा है। सिंचाई विभाग हर दो घंटे पर जल स्तर की निगरानी कर रहा है। हरिद्वार, नरौरा और कानपुर बैराज के अफसरों से संपर्क बना हुआ है। अपडेट रिपोर्ट शासन को भी भेजी जा रही है। जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने रविवार को तीन चरणों में मेला प्रशासन, सिंचाई और संबंधित विभागों के अफसरों के साथ बैठक की। साफ निर्देश हैं कि जरूरत पड़ी तो कल्पवासियों को हटाकर सुरक्षित स्थानों पर रखा जाएगा।
पांटून पुलों को खतरा, बांधे जा रहे लोहे के तार से लंगर
गंगा के जलस्तर में अचानक वृद्धि हुई तो तेज बहाव से मेला क्षेत्र में बने पांटून पुलों को खतरा हो सकता है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने अलर्ट जारी होने के बाद पुलों और पीपों को सुरक्षित करने का काम शुरू कर दिया गया है। अफसरों के मुताबिक श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए बनाए गए पुलों पर कानपुर के बैराज से जल छोड़े जाने के बाद आवागमन बंद किया जा सकता है। वहीं पांटून पुलों के किनारों पर लगे पीपों को एक बार फिर लोहे के तारों से लंगर के सहारे बांधा जाएगा। पुल नंबर एक से इसकी शुरुआत होगी।
एनडीआरएफ , जल पुलिस सतर्क, निगरानी बढ़ी
माघ मेला क्षेत्र में गंगा का जलस्तर बढ़ा तो राहत कार्य के लिए एनडीआरएफ को लगाया जा सकता है। इस संबंध में एनडीआरएफ को सूचना देकर अलर्ट किया गया है। वहीं जल पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। जल पुलिस सिंचाई विभाग के अफसरों से संपर्क कर हर स्थिति पर नजर रखेंगे। सिंचाई विभाग के अफसरों ने बताया कि गंगा का जलस्तर रविवार शाम पांच बजे 76 मीटर पर स्थित रहा।