इलाहाबाद। यह पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की शख्सियत का ही कमाल है कि बिना किसी आदेश के स्कूल-कॉलेजों ने छुुट्टी की घोषणा कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कलाम के निधन की सूचना मिलने के बाद स्कूल-कॉलेज प्रबंधन के लोग सोमवार देर रात तक इंतजार करते रहे कि प्रशासन एक दिन का आवकाश घोषित करेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ऊपर से कोई आदेश नहीं आया, सो स्कूल-कॉलेजों ने मंगलवार सुबह अपनी तरफ से छुट्टी की घोषणा कर दी। हालांकि छुट्टी निजी शिक्षण संस्थानों में ही रही, सरकारी स्कूल खुले रहे।
डॉ. कलाम का इलाहाबाद से गहरा नाता था। जब भी यहां आए, किसी शिक्षण संस्थान के दौरे पर ही आए। सुरक्षा घेरा तोड़कर बच्चों-युवाओं के बीच चले जाना, आम आदमी की तरह उनसे बात करना, ‘मिसाइल मैन’ की इस सादगी और खूबी ने किस कदर प्रभावित किया, यह उनके जाने के बाद पता चला। शायद ऐसा पहली बार हुआ, जब बिना किसी सरकारी आदेश के सीबीएसई, आईसीएसई बोर्ड के स्कूलों ने मंगलवार सुबह एक दिन की छुट्टी की घोषणा कर दी। सुबह-सुबह अभिभावकों को एसएमएस भेजकर छुट्टी की जानकारी दी गई।
हालांकि इस आपाधापी में तमाम अभिभावक बच्चों को लेकर स्कूल पहुंच गए और वहां जाकर देखा तो स्कूल-कॉलेजों में ताला लगा हुआ था। वहीं, इलाहाबाद विश्वविद्यालय एवं उससे संबद्ध महाविद्यालयों में भी अवकाश रहा। सोमवार देर रात तक यह भी चर्चा थी कि सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे लेकिन कोई आदेश जारी न होने के कारण केंद्र एवं राज्य सरकार के सभी कार्यालय मंगलवार को खुले रहे लेकिन डॉ. कलाम के निधन पर राष्ट्रीय शोक घोषित किए जाने के मद्देनजर सभी सरकारी दफ्तरों एवं संस्थानों में राष्ट्रीय ध्वज झुका रहा। दफ्तरों के साथ सरकारी स्कूलों में भी छुट्टी नहीं हुई। जीआईसी में छुट्टी की गई, मगर टीचरों का कहना है कि बुधवार को होने वाली यूपी बोर्ड की कपार्टमेंट परीक्षा की तैयारियों के मद्देनजर छुट्टी की गई थी।